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झज्जर: अमर उजाला कार्यालय में कारगिल दिवस की पूर्व संध्या पर संवाद कार्यक्रम आयोजित
इंडियन वेटरन एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष सुरेंद्र सिंह ने कहा कि कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय जवानों ने विषम परिस्थितियों में भी मनोबल नहीं टूटने दिया और दुश्मन को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। युद्ध के दौरान 530 सैनिक शहीद हुए थे, जिसमें से प्रदेश में सबसे ज्यादा 11 सैनिक झज्जर जिले के शहीद हुए थे। हमें देश पर शहीद हुए सभी सैनिकों पर गर्व है। उनकी शहादत को भुलाया नहीं जा सकता।
वह शनिवार को कारगिल दिवस की पूर्व संध्या पर अमर उजाला की तरफ से कार्यालय में आयोजित संवाद कार्यक्रम में पूर्व सैनिकों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आज भी पूर्व सैनिकों की कई समस्याएं वर्षों से लंबित हैं। इन मांगों को लंबे समय से उठाया जा रहा है, लेकिन अब तक इसका स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। खास तौर पर पूर्व सैनिकों को हर काम के लिए अलग-अलग जगहों पर जाना पड़ता है। चाहे इलाज की बात हो, चाहे कैंटीन से सामान लाने की बात हो या फिर अपने काम के लिए सैनिक बोर्ड में जाने की बात हो। यह सभी कार्यालय अलग-अलग-अलग जगहों पर बने हुए हैं। सभी कार्यालयों को एक जगह निर्माण के लिए बस अड्डे के पास दो एकड़ जमीन अलॉट की गई थी, जिस पर आज तक काम चालू नहीं हो सका। इस कारण पूर्व सैनिकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
रुडियावास निवासी कैप्टन सत्यवीर सिंह कादियान ने बताया कि वह खुद कारगिल युद्ध में शामिल थे। उनकी ड्यूटी वहीं पर थी। उस समय दोनों तरफ से भयानक युद्ध हुआ। अंत में हमारी जीत हुई और सभी जगहों पर भारतीय सेना ने कब्जा ले लिया था। हवलदार हजारी लाल, डावला निवासी धर्मवीर सिंह ने कहा कि शहीद सैनिकों का जितना सम्मान किया जाए, उतना कम है। आज भी जिले के युवाओं में फौज में जाने का जज्बा सबसे ज्यादा है।
कैप्टन कृष्ण चंद्र, नायक क्लर्क बिजेंद्र सिंह ने कहा कि चाहे भारत-पाकिस्तान के साथ या फिर भारत-चीन के साथ युद्ध हुआ हो, सभी में हमारे जवानों की वीर गाथाएं झलकती है कि कैसे दुश्मन को धूल चटाने का काम किया गया था।
नायक राय सिंह यादव, रिसालदार अब्दुल जब्बार ने कहा कि सैनिक अपने परिवारों को छोड़कर बॉर्डर पर जाकर देश की रक्षा करते हैं। वह अपने परिवार से आगे देश को रखते हैं, इसलिए सभी सैनिक सम्मानीय हैं। जिला पैटर्न राजकिशन हरित ने कहा कि पूर्व सैनिकों की कई मांग लंबित है। आज तक रेस्ट हाउस नहीं बन सका। जर्जर होने के बाद उसे नहीं बनाया गया। जिला सैनिक बोर्ड का कार्यालय भी म्यूजियम में चल रहा है। इस तरफ ध्यान देने की जरूरत है। वीर नारी सुमित्रा, पूर्व सैनिक प्रकाश सिंह, महेंद्र सिंह ने कहा कि पूर्व सैनिकों के बने अस्पताल में पूरी दवाएं नहीं मिलती। खास तौर पर महंगी दवाएं नहीं मिल रही। पूर्व सैनिकों को बाहर से खरीदनी पड़ती हैं।
कैप्टन उमराव सिंह, सूबेदार मेजर बिजेंद्र सिंह और नायक भूप सिंह ने बताया कि आधार कार्ड में गलती होने पर वीरांगनाओं को उसे ठीक करवाने के लिए चक्कर काटने पड़ते हैं। मुख्यालय तक जाना पड़ता है। इसके लिए स्थानीय स्तर पर किसी अधिकारी की ड्यूटी लगाई जानी चाहिए।
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