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The awareness of the Divine ensures a constant sense of awakening in life: Satguru Mata Sudiksha Maharaj
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परमात्मा के एहसास से जीवन में जागृति का भाव निरंतर बना रहता है : सतगुरु माता सुदीक्षा महाराज
समालखा (पानीपत)। जब हृदय में प्रेमाभक्ति का प्रकाश जागृत होता है, तब जीवन का प्रत्येक भाव प्रेम, समर्पण और मानव एकत्व की दिव्य अनुभूति से महक उठता है।
ये उद्गार सतगुरु माता सुदीक्षा महाराज ने समालखा स्थित निरंकारी आध्यात्मिक स्थल पर आयोजित चार दिवसीय 79वें वार्षिक निरंकारी संत समागम में देश-विदेश से पहुंचे लाखों श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहे। उन्होंने प्रेम, भक्ति और मानवीय एकत्व की महत्ता पर विशेष प्रकाश डाला।
सतगुरु माता सुदीक्षा महाराज ने कहा कि ब्रह्मज्ञान केवल जागृति का अंतिम पड़ाव नहीं, बल्कि इसकी वास्तविक शुरुआत है। सच्ची जागृति वही है जब मनुष्य जीवन के प्रत्येक पल में निराकार परमात्मा के एहसास के साथ प्रेम, विश्वास और विनम्रता से अपना जीवन व्यतीत करें। उन्होंने कहा कि सत्संग में केवल शारीरिक रूप से उपस्थित होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि वहां से मिलने वाली शिक्षाओं को अपने दैनिक आचरण व व्यवहार में अपनाना सबसे अधिक आवश्यक है। हमारी सेवा और समर्पण दिखावे की दुनिया से परे सच्चे भावों से परिपूर्ण होनी चाहिए। दूसरों के प्रति मन में प्रेम रखना, ईर्ष्या, निंदा और अहंकार से दूर रहना तथा अपनी वाणी व कर्मों से सदा अच्छाई दर्शाना ही वास्तविक आध्यात्मिक जागृति की मुख्य पहचान है।
उन्होंने सबको प्रेरित किया कि परमात्मा द्वारा प्रदत्त सभी साधनों का सदुपयोग मानवता की निष्काम सेवा और परोपकार के कार्यों में किया जाना चाहिए। जीवन की हर विषम परिस्थिति में भी मन की शांति, सहजता और अटूट विश्वास बनाए रखना एक सच्चे आस्तिक की पहचान है।
इस दौरान विभिन्न संस्कृतियों और पृष्ठभूमियों के श्रद्धालुओं के मिलन से पूरा समागम स्थल भक्ति, एकत्व और सद्भावना के रंगों में सराबोर नजर आया।रंगारंग सेवादल रैली और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां
समागम के दूसरे दिन का शुभारंभ आकर्षक सेवादल रैली के साथ हुआ। इस रैली में देश के कोने-कोने और विदेशों से भी बड़ी संख्या में पहुंचे हजारों सेवादल के भाई-बहनों ने पूरे उत्साह के साथ हिस्सा लिया। रैली के दौरान शारीरिक व्यायाम, अनुशासित मार्च पास्ट, खेलकूद प्रदर्शन, प्रेरणादायक स्किट और मिशन की महान शिक्षाओं पर आधारित लघु नाटिकाओं के माध्यम से अनुशासन, आपसी सहयोग और निस्वार्थ सेवा का संदेश दिया गया।
सतगुरु माता ने सेवादल के सभी प्रतिभागियों और श्रद्धालुओं को आशीर्वाद और संदेश दिया। उन्होंने कहा कि सेवा केवल एक औपचारिकता या ड्यूटी निभाने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि यह मानव जीवन का अभिन्न हिस्सा है। इससे पहले सतगुरु माता सुदीक्षा महाराज ने विश्व शांति, भाईचारे और एकत्व के प्रतीक मिशन के श्वेत ध्वज का ध्वजारोहण किया गया। संत निरंकारी सेवादल के मुख्य संचालक एसके जुनेजा ने आशीर्वाद की प्रार्थना की।
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