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Worship was offered at Shiva temples in Panipat on occasion of 'Sawan Hariyali Amavasya', and chants of "Har-Har Mahadev" echoed at the crack of dawn
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पानीपत में सावन की हरियाली अमावस्या पर शिवालयों में किया पूजन, तड़के गूंजे हर-हर महादेव के जयकारे
सावन माह की पवित्र हरियाली अमावस्या के पावन अवसर पर शहर के प्रमुख मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों का भव्य आयोजन हुआ। ब्रह्म मुहूर्त से ही श्रद्धालुओं में दर्शन-पूजन को लेकर भारी उत्साह देखा गया। तड़के पांच बजे ही शहर के विभिन्न देवालय श्रद्धालुओं की भीड़ से पट गए और पूरा माहौल 'हर-हर महादेव' के जयकारों से गुंजायमान हो उठा।
शहर के श्री सनातन धर्म मंदिर मॉडल टाउन, श्री राधा कृष्ण मंदिर दत्ता कॉलोनी, सनातन धर्म शिव मंदिर सेक्टर 11और प्रसिद्ध देवी मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं। भक्तों ने भगवान शिव का जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और भांग से अभिषेक कर परिवार की खुशहाली की मनोकामना मांगी। मंदिरों में विशेष श्रृंगार आरती के साथ-साथ भजन-कीर्तन का भी आयोजन किया गया।
आचार्य भगवत शर्मा ने बताया कि सावन की अमावस्या केवल धार्मिक दृष्टिकोण से ही नहीं, बल्कि प्रकृति संरक्षण की दृष्टि से भी अत्यंत फलदायी है। इस दिन देव पूजन के साथ पितृ तर्पण और पौधे लगाने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।
सावन में हरियाली अमावस्या का महत्व
सनातन धर्म में सावन माह की हरियाली अमावस्या का धार्मिक और पर्यावरण दोनों ही दृष्टियों से विशेष स्थान है। प्रकृति और शिव पूजन का अद्भुत योग: यह पर्व प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का दिन है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की संयुक्त पूजा से अखंड सौभाग्य और मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।
वृक्षारोपण का महापुण्य
इस तिथि पर पीपल, बरगद, नीम, शमी या तुलसी का पौधा लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, आज रोपे गए पौधों से पितृदोष का निवारण होता है और पर्यावरण का संतुलन बनता है।
पितृ तर्पण और दान
हरियाली अमावस्या पर पवित्र नदियों में स्नान, पितरों के नाम तर्पण, और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र व तिल का दान करने से ग्रह दोष शांत होते हैं और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।
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