{"_id":"69f08b54b3d7c93b54044c7c","slug":"video-amar-ujala-story-on-kiloi-village-in-rohtak-2026-04-28","type":"video","status":"publish","title_hn":"मेरा गांव मेरी शान: 1200 साल पहले बसे किलोई का इतिहास व संस्कृति है समृद्ध, 20 हजार से अधिका है आबादी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मेरा गांव मेरी शान: 1200 साल पहले बसे किलोई का इतिहास व संस्कृति है समृद्ध, 20 हजार से अधिका है आबादी
रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 28 Apr 2026 03:56 PM IST
Link Copied
कपिल मुनि की तपो स्थली किलोई का इतिहास बेहद प्राचीन व संस्कृति समृद्ध है। यहां करीब दो हजार वर्ष पुराना स्वयं भू उत्पन्न शिवलिंग हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। वर्ष 1976 में मिले इस प्राचीन शिव मंदिर को कपिलेश्वर धाम भी कहा जाता है। इस धार्मिक स्थल के पास स्थित किलोई करीब 20000 से अधिक आबादी वाला बड़ा गांव है। शहर से करीब 20 किलोमीटर दूर स्थित इस गांव में दो पंचायतें हैं। किलोई दोपाना व किलोई खास। खेल खासकर बास्केटबॉल के लिए भी यह जाना जाता है। राजनीतिक महत्व का यह गांव सामाजिक एकता व भाईचारे के लिए विशेष है। अमर उजाला ने मेरा गांव मेरी शान अभियान के तहत गांव को जानने के लिए इतिहास के पन्नों को उलट कर देखा तो यह रोचक जानकारी सामने आई।
प्राचीन शिव मंदिर किलोई (कपिलेश्वर धाम) में पिछली तीन पीढि़यों से सेवारत मंदिर समिति के पूर्व प्रधान सत्यवीर शास्त्री ने बताया कि किलोई करीब 1200 वर्ष पुराना है। यह गांव किलोई धाम के साथ बसा है। किंवदंती के अनुसार करीब दो हजार वर्ष पूर्व यहां मंदिर की दक्षिण दिशा में गुराना व उत्तर में खेड़ा गांव होते थे। यहां करीब 1200 वर्ष पूर्व अकाल पड़ा था। उस समय ये दोनों गांव उजड़ कर हिसार चले गए। यहीं से कैला नाम के नाई ने शिव मंदिर से करीब दो किलोमीटर दूर किलोई बसाया। इन्हीं के नाम पर गांव का नाम किलोई पड़ा। इन्हीं के नाम सेे अब भी गांव के जोहड़ का नाम कैला है। बाद में यहां जाट व अन्य समुदाय के लोग भी यहां आकर बस गए।
मंदिर समिति के पूर्व प्रधान ने कहा कि 1776 में सेठ बख्शीराम गर्ग को पीपल के पेड़ के नीचे मिट्टी के टीले में दवा यह शिवलिंग मिला था। पुरातत्व विभाग के सर्वे के अनुसार भी यह शिवलिंग सैकड़ों साल पुराना है। शिवरात्रि पर यहां विशाल मेला लगता है। इसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु शिरकत करते हैं।
एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें
अमर उजाला प्रीमियम वीडियो सिर्फ सब्सक्राइबर्स के लिए उपलब्ध है
प्रीमियम वीडियो
सभी विशेष आलेख
फ्री इ-पेपर
सब्सक्राइब करें
Next Article
Disclaimer
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।