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Mandi: जिला मंडी में पांच दिनों में ही 28 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद
प्राकृतिक विधि से उत्पादित गेहूं का समर्थन मूल्य 60 रुपये प्रति किलोग्राम मिलने पर किसान गदगद हैं। जिले में इस पहल के तहत अब तक 156 किसान प्राकृतिक विधि से तैयार लगभग 30.39 मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य है। इसके लिए मंडी सदर, पधर, सुंदरनगर, जोगिंद्र नगर, सरकाघाट व धर्मपुर में छह प्रापण केंद्र स्थापित किए गए हैं। एक जून से शुरू खरीद के तहत अभी तक 136 किसानों से लगभग 28 मीट्रिक टन गेहूं क्रय की जा चुकी है। किसानों की मानें तो कभी मात्र 26 रुपये प्रति किलो बिकने वाले उनके गेहूं के अब दोगुने से भी अधिक दाम मिल रहे हैं। सरकार ने किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए यह भी निर्णय लिया है कि गेहूं को प्रापण केंद्र तक लाने पर उन्हें 200 रुपये प्रति क्विंटल ढुलाई का अतिरिक्त भुगतान किया जाएगा। यह कदम पहाड़ी क्षेत्रों के किसानों के लिए राहत भरा सिद्ध हो रहा है। इसके अलावा मंडी जिला में आत्मा परियोजना के तहत गोहर, सदर व सरकाघाट क्षेत्र में 15 किसानों से प्राकृतिक तौर पर उगाई 2.955 मीट्रिक टन कच्ची हल्दी की खरीद भी बढ़े हुए मूल्यों पर की गई है। जोगिंद्रनगर के गांव कोहरा की अंबिका देवी ने बताया कि वह वर्ष 2019-20 से प्राकृतिक खेती कर रही हैं। पहले गेहूं का दाम 26 रुपये प्रति किलो तक मिलता था, लेकिन वर्तमान प्रदेश सरकार ने शुरू में इसे 40 रुपये और अब बढ़ाकर 60 रुपये प्रति किलो कर दिया है। चौंतड़ा क्षेत्र के गांव भडयाड़ा की अनीता लगभग छह साल से प्राकृतिक खेती कर रही हैं। उन्होंने कहा कि गेहूं के दामों में बढ़ोतरी का उन्हें काफी लाभ मिला है। पीपली क्षेत्र के भरमेड़ा गांव के काली दास ने कहा कि पहले उन्हें उपज का उतना मूल्य नहीं मिल पा रहा था, मगर सुक्खू सरकार ने प्राकृतिक खेती से उगाई गेहूं के दामों में बढ़ोतरी कर किसानों की मेहनत का उचित मूल्य देकर उनका सम्मान बढ़ाया है। सरकाघाट के तताहर गांव के किसान ब्रह्मदास शर्मा ने प्राकृतिक खेती से उपजे अनाज की सरकारी स्तर पर खरीद का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि सरकार के इस कदम से बिचौलियों से छुटकारा मिला है और फसल के उचित दाम भी मिल रहे हैं। इसके अलावा सूलपुर बहरी के कृष्ण चंद, सैण अलाथु के कैप्टन हुकमचंद, धर्मपुर के खनौड़ गांव के कृष्ण चंद ने भी बढ़े दामों पर खुशी जताई।
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