{"_id":"6a3268ce6971baf42e0b4cbf","slug":"video-vibrant-village-programme-2026-youth-team-leaves-to-explore-border-villages-of-kinnaur-2026-06-17","type":"video","status":"publish","title_hn":"Kinnaur: सीमावर्ती 13 गांवों की संस्कृति और जीवनशैली को जानेंगे युवा, वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम का दूसरा चरण शुरू","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kinnaur: सीमावर्ती 13 गांवों की संस्कृति और जीवनशैली को जानेंगे युवा, वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम का दूसरा चरण शुरू
Ankesh Dogra
Updated Wed, 17 Jun 2026 02:58 PM IST
Link Copied
माई भारत युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय और आईटीबीपी के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित विकसित भारत वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम में देश के युवा विभिन्न जानकारियां जुटा रहे हैं। द्वितीय चरण में 63 प्रतिभागियों का दल बुधवार को सीमावर्ती क्षेत्रों की ओर रवाना हुए। 6 दलों में बंटे युवा सीमावर्ती क्षेत्र के 13 गांवों में पहुंचकर वहां की संस्कृति, सांस्कृतिक गतिविधियों और जन जीवन के बारे में जानेंगे। माई भारत युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार और आईटीबीपी के संयुक्त तत्वाधान में विकसित भारत वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के द्वितीय चरण का शुभारंभ रिकांगपिओ से हुआ। यह कार्यक्रम सीमावर्ती क्षेत्रों के समग्र विकास, युवाओं की राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी और सीमांत समुदायों के साथ उनके सार्थक जुड़ाव को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम भारत सरकार की उस परिकल्पना के अनुरूप है, जिसके अंतर्गत सीमावर्ती गांवों को विकास, सहभागिता और आत्मनिर्भरता के केंद्र के रूप में सशक्त बनाया जा रहा है। प्रतिभागियों को 17 वीं वाहिनी आईटीबीपी के उप कमांडेंट वीरेंद्र सिंह और उप कमांडेंट सुखराज सिंह सिद्धू ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए सीमावर्ती गांवों के सामरिक, सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने युवाओं को राष्ट्रीय एकता, सामाजिक सेवा और सामुदायिक विकास के दूत के रूप में कार्य करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने मेरा युवा भारत और आईटीबीपी के संयुक्त प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यह कार्यक्रम युवाओं को सीमांत क्षेत्रों के जीवन, संस्कृति और चुनौतियों को निकट से समझने का एक उत्कृष्ट अवसर प्रदान करता है। गांवों के लिए रवाना होने से पूर्व सभी प्रतिभागियों ने आईटीबीपी बेस कैंप रिकांगपिओ में तीन दिवसीय अनुकूलन प्रशिक्षण प्राप्त किया। इस दौरान स्वास्थ्य, शारीरिक परीक्षण, सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देश, स्थानीय संस्कृति एवं परंपराओं की जानकारी, उच्च हिमालयी क्षेत्रों में कार्य करने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन और आईटीबीपी अधिकारियों के साथ संवाद सत्र आयोजित किए गए। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य प्रतिभागियों को ऊंचाई वाले क्षेत्रों में कार्य करने के लिए शारीरिक एवं मानसिक रूप से तैयार करना था। अपने सात दिवसीय प्रवास के दौरान प्रतिभागी स्वच्छता अभियान, जन-जागरूकता कार्यक्रम, खेल एवं युवा गतिविधियां, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, स्थानीय विद्यालयों एवं समुदायों के साथ संवाद, सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूकता और सामुदायिक विकास से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों का संचालन करेंगे। इन गतिविधियों के माध्यम से युवाओं और स्थानीय समुदायों के बीच पारस्परिक सीख, सहयोग और विश्वास को बढ़ावा मिलेगा। कार्यक्रम में युवा सीमावर्ती क्षेत्रों की वास्तविकताओं को समझने, स्थानीय समुदायों के साथ जुड़ने और राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में सक्रिय योगदान देने का एक अनूठा मंच प्रदान करता है। मेरा युवा भारत और आईटीबीपी के संयुक्त प्रयासों से यह कार्यक्रम विकसित, आत्मनिर्भर और सशक्त भारत के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हो रहा है।
एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें
अमर उजाला प्रीमियम वीडियो सिर्फ सब्सक्राइबर्स के लिए उपलब्ध है
प्रीमियम वीडियो
सभी विशेष आलेख
फ्री इ-पेपर
सब्सक्राइब करें
Next Article
Disclaimer
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।