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Sirmaur: डॉ. जोगेंद्र हाब्बी को संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, राष्ट्रपति ने किया सम्मानित
Ankesh Dogra
Updated Thu, 13 Aug 2026 04:12 PM IST
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सिरमौर की समृद्ध लोक सांस्कृतिक विरासत को देश-दुनिया तक पहुंचाने और उसके संरक्षण व संवर्धन में उल्लेखनीय योगदान के लिए अंतरराष्ट्रीय लोक कलाकार डॉ. जोगेंद्र हाब्बी को संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित भव्य अलंकरण समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें यह सम्मान प्रदान किया।
समारोह का शुभारंभ राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, केंद्रीय संस्कृति राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह, संस्कृति मंत्रालय के सचिव विवेक अग्रवाल और संगीत नाटक अकादमी की अध्यक्ष डॉ. संध्या पुरेचा समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
डॉ. जोगेंद्र हाब्बी पिछले तीन से चार दशकों से सिरमौरी नाटी समेत विभिन्न पारंपरिक लोक विधाओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए काम कर रहे हैं। उनके नेतृत्व में लोक कलाकारों ने लोक संस्कृति की मौलिकता को बनाए रखने पर विशेष जोर दिया।
लोक प्रस्तुतियों में रीमिक्स गीतों और इलेक्ट्रॉनिक वाद्य यंत्रों से दूरी रखते हुए पारंपरिक लोक वाद्यों, लोक परिधानों, लोकगीतों और लोक नृत्यों को मूल स्वरूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया। देश-विदेश के हजारों मंचों पर प्रस्तुतियों के माध्यम से सिरमौर की हाटी संस्कृति की विशिष्ट पहचान को व्यापक स्तर पर पहुंचाया गया।
डॉ. हाब्बी के प्रयासों से सिरमौरी नाटी को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने के प्रयासों को विभिन्न अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड में दर्ज उपलब्धियों के रूप में भी मान्यता मिली है। उनकी सांस्कृतिक साधना के लिए विदेश के एक विश्वविद्यालय की ओर से उन्हें मानद डॉक्टरेट की उपाधि से भी सम्मानित किया जा चुका है।
पद्मश्री से सम्मानित वरिष्ठ साहित्यकार विद्यानन्द सरैक और उस्ताद बिस्मिल्लाह खां पुरस्कार से सम्मानित लोक कलाकार गोपाल हाब्बी ने संयुक्त बयान जारी कर डॉ. जोगेंद्र हाब्बी को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी।
उन्होंने कहा कि संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार केवल डॉ. हाब्बी की व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह हिमाचल प्रदेश की समृद्ध लोक संस्कृति और सिरमौर की हाटी सांस्कृतिक विरासत का भी राष्ट्रीय सम्मान है।
उन्होंने विश्वास जताया कि इस सम्मान से लोक कलाओं के संरक्षण और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के प्रयासों को नई ऊर्जा मिलेगी।
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