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Una: बढ़ती लागत और घटते दामों ने बढ़ाई किसानों की चिंता
Ankesh Dogra
Updated Mon, 20 Apr 2026 10:33 AM IST
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जिला ऊना के विभिन्न क्षेत्रों में इन दिनों रबी फसल का सीजन अपने चरम पर है। एक ओर जहां किसान गेहूं की कटाई में व्यस्त हैं, वहीं दूसरी ओर आलू की खुदाई का कार्य भी तेजी से जारी है। अंब क्षेत्र के टकरला गांव में भी आलू की खुदाई शुरू हो चुकी है, जिससे खेतों में इन दिनों खासा रौनक देखने को मिल रही है। स्थानीय किसान रामा सैनी ने बताया कि जैसे ही किसानों की फसल तैयार होती है, वैसे ही बाजार में उसके दाम गिरने लगते हैं, जिससे उन्हें उचित लाभ नहीं मिल पाता। उन्होंने कहा कि इस समय ट्रैक्टर के साथ डिगर (खुदाई मशीन) लगाकर आलू निकाले जा रहे हैं और इस कार्य में करीब 20 से 25 मजदूर लगे हुए हैं। मजदूरों द्वारा खेतों से आलू इकट्ठा करने के लिए 50 से 60 रुपये प्रति तोड़ा (बैग) मजदूरी तय की गई है, जबकि सिलाई और लदाई के लिए 10 रुपये प्रति तोड़ा अलग से दिए जा रहे हैं। सैनी ने बताया कि बाजार में बारदाना (तोड़ा) भी 30 से 40 रुपये प्रति बैग के हिसाब से मिल रहा है, जिससे लागत और बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि मंडियों में आलू का भाव 120 से 130 रुपये प्रति तोड़ा होने के बावजूद भी किसानों को अपनी उपज बेचने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इतनी कम कीमत में लागत निकालना भी चुनौती बन गया है। इसी विषय पर किसान अर्जुन सिंह ने कहा कि खेती अब पहले की तरह लाभकारी नहीं रह गई है। बढ़ती लागत, मजदूरी और बाजार में अनिश्चित दाम किसानों के लिए चिंता का विषय बनते जा रहे हैं। उन्होंने मांग की कि यदि सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) या उचित खरीद व्यवस्था सुनिश्चित करे, तो किसानों को राहत मिल सकती है। वहीं, किसान बलवीर सिंह का कहना है कि किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य तभी मिल सकता है, जब भंडारण और विपणन की बेहतर व्यवस्था हो। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को कोल्ड स्टोरेज और स्थानीय स्तर पर खरीद केंद्रों की संख्या बढ़ानी चाहिए, ताकि किसानों को अपनी फसल औने-पौने दामों में बेचने के लिए मजबूर न होना पड़े। कुल मिलाकर, क्षेत्र में उत्पादन अच्छा होने के बावजूद किसानों को उचित मूल्य नहीं मिल रहा है, जिससे उनकी मेहनत का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा। किसानों ने सरकार और संबंधित विभागों से मांग की है कि फसलों के उचित दाम सुनिश्चित किए जाएं, ताकि कृषि क्षेत्र को मजबूती मिले और किसानों की आय में वृद्धि हो सके।
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