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सीट शेयरिंग में पीएम मोदी ने चिराग पासवान को कैसे मनाया?
अमर उजाला डिजिटल डॉट कॉम Published by: आदर्श Updated Mon, 13 Oct 2025 10:13 AM IST
बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले एनडीए में सीटों को लेकर चल रहा सस्पेंस आखिरकार खत्म हो गया। लंबे मंथन, कई दौर की बैठकें और आंतरिक रस्साकशी के बाद रविवार को भाजपा-जदयू गठबंधन ने सहयोगी दलों के साथ सीट बंटवारे पर अंतिम सहमति बना ली है। बिहार के चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इसकी आधिकारिक घोषणा करते हुए कहा कि एनडीए ने “अच्छे माहौल” में सीटों पर समझौता फाइनल कर लिया है।
प्रधान के मुताबिक, इस बार भाजपा और जदयू 101-101 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे। जबकि लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को 29 सीटें, और हम (जीतन राम मांझी) तथा राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (उपेंद्र कुशवाहा) को 6-6 सीटें दी गई हैं।
इस पूरे समझौते में अगर किसी को सबसे बड़ा लाभार्थी कहा जाए तो वह हैं चिराग पासवान। एनडीए के अंदरूनी सूत्र बताते हैं कि चिराग शुरू से ही 30 से 35 सीटों की दावेदारी कर रहे थे और वे किसी भी कीमत पर 25 सीटों से नीचे जाने को तैयार नहीं थे। वहीं दूसरी ओर जदयू के कुछ नेता इतने बड़े हिस्से को लेकर आपत्ति जता रहे थे।
मामला तब बिगड़ता नजर आने लगा जब चिराग ने संकेत दिया कि अगर सम्मानजनक सीटें नहीं मिलीं तो वे “स्वतंत्र रास्ता” चुन सकते हैं। लेकिन तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सीधी दखल ने तस्वीर बदल दी।
सूत्रों के मुताबिक, पीएम मोदी ने खुद चिराग पासवान से बात कर उन्हें “कुछ बड़ा करने का भरोसा” दिया यह “बड़ा” क्या है, इस पर अभी सस्पेंस बरकरार है। माना जा रहा है कि चुनाव के बाद बिहार में चिराग पासवान की भूमिका को केंद्र या राज्य स्तर पर नई ऊंचाई दी जा सकती है।
जहां चिराग पासवान मुस्कुरा रहे हैं, वहीं जीतन राम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा को इस बार अपेक्षाकृत कम सीटें मिली हैं। दोनों ही नेता 15 सीटों की दावेदारी कर रहे थे। लेकिन अंततः उन्हें छह-छह सीटों पर ही संतोष करना पड़ा।
हालांकि, मांझी ने समझौते के बाद स्पष्ट कहा कि वे प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में “अटल विश्वास” रखते हैं और एनडीए के साथ मजबूती से खड़े रहेंगे। याद रहे, कुछ दिन पहले मांझी ने बयान दिया था कि अगर सम्मानजनक सीटें नहीं मिलीं तो वे अकेले चुनाव लड़ सकते हैं। इस बयान ने उस वक्त राजनीतिक हलचल मचा दी थी, लेकिन अब वे ‘सॉफ्ट टोन’ में लौट आए हैं।
भाजपा और जदयू दोनों ही 101 सीटों पर लड़ रहे हैं, जो 2020 के फॉर्मूले से थोड़ा अलग है। उस समय जदयू को अधिक सीटें दी गई थीं, लेकिन इस बार भाजपा ने बराबरी का फार्मूला अपनाया है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह “इक्वल सीट शेयरिंग” का संदेश एनडीए के भीतर संतुलन और एकजुटता को दर्शाने के लिए महत्वपूर्ण है। साथ ही, भाजपा यह भी दिखाना चाहती है कि वह अब बिहार में “समान भागीदारी वाला बड़ा भाई” है, न कि सिर्फ सहयोगी।
इस बीच, दिल्ली में रविवार देर रात भाजपा की चुनाव समिति की बैठक चली, जिसमें पहले चरण की सीटों पर प्रत्याशियों के नामों पर चर्चा की गई। सूत्रों का कहना है कि सोमवार को भाजपा अपनी पहली सूची जारी कर सकती है, जिसमें पहले चरण के प्रत्याशियों के नामों का ऐलान होगा।
इस बैठक में गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, और चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान मौजूद रहे। माना जा रहा है कि पहले चरण की सीटों पर उम्मीदवारों के नामों को लेकर लगभग सहमति बन चुकी है।
एनडीए के भीतर सीट बंटवारा भले फाइनल हो गया हो, लेकिन असली परीक्षा अब उम्मीदवारों के चयन और जमीनी समीकरणों में होगी। चिराग पासवान की 29 सीटों पर पार्टी कैसे प्रदर्शन करती है, यह NDA के लिए निर्णायक साबित होगा। वहीं, महागठबंधन की ओर से राजद और कांग्रेस के बीच अभी भी सीटों पर रस्साकशी जारी है। ऐसे में एनडीए का सीटों का समय से पहले ऐलान सियासी बढ़त साबित हो सकता है।
बिहार की राजनीति में यह सीट बंटवारा सिर्फ नंबरों का खेल नहीं, बल्कि नेतृत्व, भरोसे और भविष्य के संकेतों का संतुलन भी है। और इस संतुलन के केंद्र में इस बार फिर हैं नरेंद्र मोदी और चिराग पासवान।
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