अमर उजाला के न्यूजरूम में जया किशोरी का ये खास इंटरव्यू कई मायनों में अलग है। इसमें उन्होंने जीवन, भक्ति, अध्यात्म और आज के युवाओं के लिए अपने विचार साझा किए। जानिए कैसे जया किशोरी अपनी वाणी और विचारों से करोड़ों लोगों को प्रभावित कर रही हैं।
प्रश्न: आपने सोशल मीडिया पर आने को मजबूरी बताया। ट्रोलर्स की प्रतिक्रिया आपको कैसे प्रभावित करती है?
उत्तर: मैं तभी ट्रोल्स पढ़ती हूं जब उनका मैसेज रचनात्मक हो। अगर कोई अपने जीवन में कुछ सार्थक बदलाव लाया है और उसकी टिप्पणी में मूल्य जोड़ने की इच्छा है, तो मैं उसे ध्यान से पढ़ती हूं, लेकिन गुमनामी छिपाकर जो केवल बुराई करने आते हैं, उनकी बात मुझे दुखी नहीं करती, उन्हें मैं इग्नोर कर देती हूं।
प्रश्न: आज के युवाओं को अध्यात्म से जोड़ने में ‘पैकेजिंग’ का क्या महत्व है?
उत्तर: युवाओं के लिए सही पैकेजिंग बेहद जरूरी है। हम मॉडर्न डिजिटल माध्यमों, जैसे रील्स, चैटबॉट सारथी के जरिए अध्यात्म का संदेश सरल और आकर्षक तरीके से पेश कर रहे हैं। यदि कंटेंट का ‘प्रोडक्ट’ अच्छा है, तो उसकी पैकेजिंग और भी सुंदर होनी चाहिए ताकि संदेश प्रभावी रूप से पहुंचे।
प्रश्न: बुजुर्गों और युवाओं के मेल-जोल पर आपका क्या दृष्टिकोण है?
उत्तर: बुजुर्गों का अनुभव (आंखें) और युवाओं की ऊर्जा (पैर) मिलकर समाज को सही दिशा दे सकते हैं। आज की भागदौड़ में धैर्य कम हो गया है, यदि युवा चुपचाप आठ बातें सुनें और दो महत्वपूर्ण बातें सीख लें, तो जीवन में बदलाव संभव है।
प्रश्न: “इट्स ओके” किताब का मूल भाव क्या है?
उत्तर: यह किताब युवा पीढ़ी को सिखाती है कि जो कुछ भी है, वह “ठीक है”। कामयाबी या असफलता में निराश होने के बजाय, स्थिति स्वीकार कर सुधार की कोशिश करें। किताब का उद्देश्य पाठक को विपरीत परिस्थितियों में सांत्वना और प्रेरणा देना है।
प्रश्न: आध्यात्मिक प्रवचन में ब्रांडिंग पर क्या कहेंगी?
उत्तर: मार्केटिंग और ब्रांडिंग इसलिए जरूरी हैं क्योंकि इससे सही संदेश दूर-दराज तक पहुंचेगा। यदि कंटेंट की गुणवत्ता उत्तम है, तो उसे प्रभावी रूप से प्रसारित करना गलत नहीं। असली सवाल यह है कि पैकेजिंग संदेश का समर्थन करे, न कि मूल अध्यात्म को कमजोर करे।
देखिए पूरा इंटरव्यू…