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VIDEO: माइक्रोफॉसिल्स अध्ययन में AI की भूमिका पर जोर, डेटा डिजिटाइजेशन की जरूरत बताई
लखनऊ स्थित बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान में आयोजित सत्र में वैज्ञानिकों ने माइक्रोफॉसिल्स (सूक्ष्म जीवाश्म) के अध्ययन को आधुनिक तकनीक से जोड़ने पर बल दिया। संस्थान की वैज्ञानिक अंजलि त्रिवेदी ने बताया कि सूक्ष्म जीवाश्मों का अध्ययन अत्यधिक श्रमसाध्य और समय लेने वाली प्रक्रिया है। उन्होंने वर्तमान में उपलब्ध स्लाइड्स के डेटा को डिजिटाइज करने की आवश्यकता बताई ताकि इसे भविष्य के शोध के लिए सुरक्षित किया जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि पुराना डेटा ही भविष्य की कुंजी है। यदि हमारे पास अतीत के जलवायु और पर्यावरण का सटीक डेटा होगा, तो हम आने वाले समय में होने वाले जलवायु परिवर्तनों का बेहतर पूर्वानुमान लगा सकेंगे। इस दिशा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) एक अहम भूमिका निभा सकता है। डिजिटल डेटा और AI की मदद से शोध में लगने वाले वर्षों के समय को कम किया जा सकता है, जिससे वैश्विक स्तर पर वैज्ञानिकों को नई खोजों में मदद मिलेगी।
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