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Chhindwara News: Doctors failed to reach ICU for 3 hours; two patients died and families erupted in anger
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Chhindwara: बुलाने पर भी 3 घंटे तक नहीं पहुंचे डॉक्टर, ICU में भर्ती दो मरीजों की मौत, परिजनों का फूटा गुस्सा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छिंदवाड़ा Published by: छिंदवाड़ा ब्यूरो Updated Tue, 13 Jan 2026 12:27 AM IST
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जिला अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्थाएं एक बार फिर सवालों के घेरे में हैं। रविवार सुबह ICU-2 में भर्ती दो गंभीर मरीज इलाज के इंतजार में दम तोड़ बैठे। आरोप है कि तीन घंटे तक कोई डॉक्टर वार्ड में नहीं पहुंचा, जबकि नर्सिंग स्टाफ और परिजन लगातार डॉक्टरों को बुलाने की गुहार लगाते रहे। घटना के बाद अस्पताल परिसर में तनाव फैल गया। परिजनों ने प्रबंधन पर लापरवाही से मौत का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया।
पातालेश्वर निवासी विश्वास मानेकर ने बताया कि उनकी मां इंदिराबाई को हालत बिगड़ने पर ICU-2 में भर्ती कराया गया था। सुबह से ही उनकी तबीयत लगातार बिगड़ रही थी।
विश्वास का कहना है कि सुबह 6 से 9 बजे तक वे डॉक्टर को बुलाने के लिए स्टाफ से गुहार लगाते रहे लेकिन कोई नहीं आया। अंततः सुबह 9 बजे उनकी मां ने दम तोड़ दिया इसी दौरान आईसीयू में भर्ती एक अन्य मरीज की भी मौत हो गई।
ड्यूटी रोस्टर के अनुसार उस समय जूनियर डॉक्टर पंकज मिश्रा, डीआरपी डॉक्टर योगेंद्र और डॉ. एम.पी. यादव की ड्यूटी थी। परिजनों का आरोप है कि कई बार कॉल किए जाने के बावजूद कोई भी डॉक्टर आईसीयू नहीं पहुंचा इससे यह सवाल खड़ा हो गया है कि जब डॉक्टर ड्यूटी पर थे, तो मरीजों को भगवान भरोसे क्यों छोड़ दिया गया।
आईसीयू में हुई दो मौतों के बाद परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की और दोषियों पर हत्या का केस दर्ज करने की मांग की। कुछ देर के लिए अस्पताल में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थिति बिगड़ते देख पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे।
मामले में सिविल सर्जन डॉ. सुशील दुबे ने तत्काल जांच के आदेश देते हुए तीन सदस्यीय समिति बनाई, जिसमें डॉ. रवि टांडेकर, आरएमओ डॉ. हर्षवर्धन कुड़ापे और डॉ. हितेश रामटेके शामिल किए गए हैं। कमेटी यह जांच करेगी कि मरीजों के इलाज में कहां और किस स्तर पर लापरवाही हुई। सिविल सर्जन ने कहा कि दोषी पाए जाने पर संबंधित डॉक्टरों और कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
बता दें कि यह पहली बार नहीं है, जब जिला अस्पताल की लापरवाही सामने आई हो। इससे पहले भी कई मामलों में समय पर इलाज न मिलने के आरोप लग चुके हैं। कलेक्टर के निर्देशों और बैठकों के बावजूद व्यवस्था में कोई ठोस सुधार नहीं हो पाया है।
पीड़ित परिवारों का कहना है कि दोषी डॉक्टरों को तत्काल निलंबित किया जाए, उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज हो और मृतकों के परिवार को मुआवजा दिया जाए। परिजनों ने कहा कि अगर सिस्टम नहीं सुधरा, तो अगली मौत किसी और के घर की खुशियां छीन लेगी।
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