डिंडौरी के कनई सांगवा ग्राम में भीषण जल संकट ने ग्रामीणों का सब्र तोड़ दिया। महीनों से पानी की समस्या झेल रहे ग्रामीण आखिरकार खाली बर्तन लेकर नेशनल हाईवे पर उतर आए और करीब दो घंटे तक चक्काजाम कर प्रशासन के खिलाफ जमकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) विभाग पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए।
ग्रामीणों का कहना है कि गांव में पेयजल व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है। गांव के तीनों हैंडपंप लंबे समय से खराब पड़े हैं, लेकिन उनकी मरम्मत के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया। वहीं नल-जल योजना भी ग्रामीणों के लिए केवल कागजों तक सीमित नजर आ रही है, क्योंकि नियमित जल आपूर्ति नहीं हो रही है। गांव का एकमात्र सार्वजनिक कुआं भी जर्जर स्थिति में है, जिसके सुधार के लिए पंचायत द्वारा प्रस्ताव तैयार किया जा चुका है, लेकिन काम शुरू नहीं हो पाया है।
ग्रामीणों ने बताया कि पंचायत द्वारा दो बार नए हैंडपंप खनन के लिए पीएचई विभाग को प्रस्ताव भेजा गया, लेकिन विभागीय अधिकारियों ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की। नतीजा यह है कि सैकड़ों ग्रामीण पानी की एक-एक बूंद के लिए परेशान हैं। गांव में दो तालाब और एक नदी जरूर हैं, लेकिन उनमें मौजूद गंदा पानी उपयोग के योग्य नहीं है। ऐसे में लोग मजबूरी में झिरिया से निकलने वाला दूषित पानी छानकर पीने को मजबूर हैं, जिससे बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है।
जल संकट से त्रस्त ग्रामीणों ने जब अपनी मांगों पर कोई सुनवाई नहीं होते देखी तो खाली बर्तनों के साथ नेशनल हाईवे पर प्रदर्शन शुरू कर दिया। देखते ही देखते सड़क पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यातायात पूरी तरह प्रभावित हो गया। सूचना मिलने पर तहसीलदार, यातायात पुलिस और कोतवाली थाना प्रभारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों से चर्चा कर उन्हें आश्वासन दिया। अधिकारियों की समझाइश के बाद चक्काजाम समाप्त हुआ।
हालांकि विरोध प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने संवेदनशीलता का परिचय भी दिया। कॉलेज जाने वाले छात्र-छात्राओं तथा 108 एम्बुलेंस जैसे आपातकालीन वाहनों को रास्ता देकर उन्होंने अपनी सामाजिक जिम्मेदारी निभाई।
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ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही खराब हैंडपंपों की मरम्मत, नियमित नल-जल आपूर्ति और नए जल स्रोतों की व्यवस्था नहीं की गई तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। फिलहाल कनई सांगवा के ग्रामीण प्रशासन की ओर उम्मीद भरी निगाहों से देख रहे हैं कि उनकी प्यास बुझाने के लिए अब सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि जमीनी कार्रवाई होगी।