ग्वालियर में डॉ. भीमराव आंबेडकर का पोस्टर जलाने के मामले में गिरफ्तार एडवोकेट अनिल मिश्रा को कोर्ट के आदेश के बाद बुधवार रात करीब 9 बजे अनिल मिश्रा को उनके तीन अन्य साथियों के साथ केंद्रीय जेल से रिहा कर दिया गया। जेल से रिहाई के दौरान बड़ी संख्या में उनके समर्थक और वकील जेल के बाहर मौजूद थे। हालांकि रिहा होने के बाद अनिल मिश्रा ने मीडिया से कोई बातचीत नहीं की। सीधे अपने साथियों के साथ कार से घर के लिए रवाना हो गए।
एडवोकेट अनिल मिश्रा के जेल से बाहर आने के बाद बुधवार रात उनके पटेल नगर स्थित निवास पर समर्थकों ने आतिशबाजी की। इस दौरान समर्थक 'जय श्रीराम' का जयकारा लगाते रहे। यह वीडियो उनके समर्थकों ने सोशल मीडिया में भी अपलोड किया गया है। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि अनिल मिश्रा को अवैध रूप से हिरासत में लिया गया था।एफआईआर दर्ज करने और गिरफ्तारी की प्रक्रिया में कई गंभीर खामियां पाई गईं। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि पुलिस उन्हें नोटिस देकर भी छोड़ सकती थी, लेकिन इसके बावजूद गिरफ्तारी की गई। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में इस प्रकरण से जुड़े जुलूस और अन्य गतिविधियों पर भी रोक लगा दी है।
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अनिल मिश्रा को एक जनवरी की रात डॉ. आंबेडकर का पोस्टर जलाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। ग्वालियर साइबर पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर अनिल मिश्रा सहित कुल आठ लोगों को आरोपी बनाया था। कोर्ट के इस आदेश के बाद संभावना जताई जा रही है कि मामले में गिरफ्तार अन्य आरोपियों को भी निचली अदालत से जमानत मिल सकती है। वहीं एफआईआर को रद्द कराने के लिए अलग से कानूनी प्रक्रिया अपनाने की तैयारी भी की जा रही है।
इस घटना को लेकर ग्वालियर में 2 जनवरी को भारी विरोध प्रदर्शन हुआ था। भीम आर्मी, आजाद समाज पार्टी सहित विभिन्न दलित संगठनों ने कलेक्ट्रेट पर करीब ढाई घंटे तक धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने दर्ज एफआईआर को अपर्याप्त बताते हुए मुख्य आरोपी अनिल मिश्रा पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) लगाने की मांग की थी।