मध्यप्रदेश के कटनी जिले में चल रहे 34 किमी लंबे ग्रेड सेपरेटर के काम अब लगभग अपने अंतिम चरण में है। जिसके पूरा होते ही गुड्स ट्रेनें बिना रेल यातायात को प्रभावित किए 5 जंक्शन को पार कर अपने गंतव्य को रवाना होगी। इससे एक सीधा फायदा यात्री ट्रेनों को भी होगा चूंकि गुड्स ट्रेन (मालगाड़ी) जब ग्रेड सेपरेटर से क्रॉस करेगी तो स्टेशनों का रेल ट्रैफिक कम होगा और यात्री ट्रेनें समय से रवाना हो सकेगी।
कटनी में बन रहे ग्रेड सेपरेटर को भारत का सबसे लंबा रेलवे वायाडक्ट कहा जा रहा है। जिसके 15.85 किमी लंबे अप ग्रेड सेपरेटर रेल ट्रेक को कटनी-बिना रेलखंड से जोड़ने के लिए 3 दिवसीय नॉन इंटरलॉकिंग कार्य चलाते हुए पूरा किया है। जिसके बाद कटंगी खुर्द स्टेशन से न्यू मझगवां स्टेशन तक मालगाड़ी का सफल परिचालन किया गया है। ट्रैक पूरा होने के बाद अब जबलपुर मंडल के अधिकारियों को चीफ सेफ्टी कमिश्नर के निरीक्षण का इंतजार है, सीआरएस की अनुमति मिलते ही ट्रैक पर ट्रेनों का संचालन शुरू हो जाएगा।
बता दें पूरे ग्रेड सेपरेटर को 689 पिलर पर खड़ा किया गया है, जिसमें 16 किमी अप लाइन के 264 पिलर बनाया गया है। इनकी शुरुआत झलवारा स्टेशन से शुरू होकर मझगवां स्टेशन पार करते ही खत्म हो जाती है। वहीं डाउन लाइन के लिए 425 पिलर खड़े किए गए, जिससे इसकी लंबाई 2 किमी बढ़ते हुए करीब 18 किमी लंबी हो जाती है। इस तरह अप एंड डाउन मिलाकर ग्रेड सेपरेटर में कुल 34 किमी लंबी रेल लाइन बिछाई जा रही है और आने वाले वक्त में इन्हें पिलर में बिछी रेल लाइन पर गुड्स ट्रेन रफ्तार भरेगी। इसलिए लोग इस ग्रेड सेपरेटर को उड़ता जंक्शन के नाम दे चुके है।
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जानकारी के मुताबिक 1800 करोड़ की लागत से बनने वाले इस 34 किमी ग्रेड सेपरेटर का कार्य लगभग पूरा होने वाला है। इसके लिए रेलवे ने एक इंजन के साथ 7 मालगाड़ी के डिब्बे की टेस्टिंग की है। इस दौरान कुछ कमियां मिली थी, जिसे जल्द दूर करते हुए पूरे ग्रेड सेपरेटर का कार्य खत्म किया जाएगा। जिसके बाद बिलासपुर और सिंगरौली से आने वाली मालगाड़ी सीधा झलवारा स्टेशन से शुरू होने वाले उड़ते जंक्शन पर चढ़कर न्यू कटनी जंक्शन, कटनी जंक्शन, कटनी साउथ जंक्शन, कटनी मुड़वारा जंक्शन और मझगवां स्टेशन को पार करने के बाद उतरते हुए सीधा दमोह सागर की ओर निकल जाएगी। हालांकि 17.52 किमी लंबे डाउन रेल ट्रैक के निमार्ण में कंपनी की रफ्तार काफी धीमी नजर आ रही है, जिसे पूरा होने में करीब 8 माह का समय लग सकता है।