देश की करेंसी छापने के लिए इस्तेमाल होने वाले विशेष कागज का उत्पादन करने वाली नर्मदापुरम स्थित सिक्योरिटी पेपर मिल (एसपीएम) में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। तीन यूनियन पदाधिकारियों के निलंबन के विरोध में कर्मचारी यूनियन के बैनर तले दूसरे दिन भी धरने पर डटी हुई है। फिलहाल उत्पादन कार्य जारी है, लेकिन यूनियन ने साफ चेतावनी दी है कि यदि प्रबंधन ने उनकी मांगें नहीं मानीं तो आने वाले दिनों में काम बंद किया जा सकता है। ऐसे में देश की करेंसी के लिए कागज तैयार करने की प्रक्रिया पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
धरने पर बैठे कर्मचारियों का आरोप है कि यूनियन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष राघवेंद्र गौर, वरिष्ठ उपाध्यक्ष पवन चौधरी और उपाध्यक्ष खुमान सिंह को बिना किसी पूर्व सूचना, स्पष्टीकरण और निष्पक्ष जांच के सीधे निलंबित कर दिया गया। इस कार्रवाई से कर्मचारियों में भारी नाराजगी है और मिल गेट पर लगातार प्रदर्शन किया जा रहा है।
यूनियन पदाधिकारी राघवेंद्र गौर के मुताबिक पूरा विवाद 29 मई को एक इंटरकॉम कॉल से शुरू हुआ। यूनियन कार्यालय से कर्मचारी नीरज पटेरिया को फोन लगाने के दौरान एक अंक गलत डायल हो गया और कॉल गेस्ट हाउस में ठहरे डिप्टी मैनेजर अजय गुप्ता के पास पहुंच गई। आरोप है कि बातचीत के दौरान डिप्टी मैनेजर ने अभद्र व्यवहार किया और फोन काट दिया। बाद में दोबारा संपर्क कर पहचान बताई गई, लेकिन विवाद और बढ़ गया।
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यूनियन का दावा है कि मामले की जानकारी मिलने पर पदाधिकारी डिप्टी मैनेजर से मिलने पहुंचे, जहां दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई। आरोप है कि इस दौरान पवन चौधरी के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट तक हुई, जिसमें उन्हें चोटें भी आईं। कर्मचारियों का कहना है कि पूरी घटना की शिकायत प्रबंधन को दी गई, लेकिन कार्रवाई डिप्टी मैनेजर पर करने के बजाय यूनियन नेताओं को ही निलंबित कर दिया गया।
अब कर्मचारियों ने मोर्चा खोल दिया है। उनका कहना है कि यदि निलंबन आदेश वापस नहीं लिया गया और निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई तो आंदोलन को और उग्र बनाया जाएगा। ऐसे में देश की करेंसी के लिए कागज बनाने वाली इस महत्वपूर्ण इकाई में हालात बिगड़ते हैं तो इसका असर राष्ट्रीय स्तर तक दिखाई दे सकता है।