नर्मदापुरम जिले के पिपरिया सिविल अस्पताल से एक गंभीर लापरवाही और अनियमितता का मामला सामने आया है, जिसने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां एक ओटी अटेंडर द्वारा महिला के स्तन की गांठ का कथित रूप से अवैध ऑपरेशन किए जाने के आरोप के बाद विभाग ने सख्त कार्रवाई करते हुए आरोपी को निलंबित कर दिया है।
डॉक्टर बनकर ऑपरेशन करने का आरोप
जानकारी के अनुसार, सिंगानामा गांव की 20 से 22 वर्षीय नवविवाहिता, जो हाल ही में मां बनी थी। वह स्तन में गांठ की शिकायत लेकर पिपरिया सिविल अस्पताल पहुंची थी। आरोप है कि अस्पताल में तैनात ओटी अटेंडर बरसाती लाल मांझी ने खुद को डॉक्टर बताकर महिला को ऑपरेशन थिएटर में ले जाकर सर्जरी कर दी। बताया जा रहा है कि इस दौरान न तो कोई योग्य सर्जन मौजूद था और न ही किसी प्रकार की आवश्यक जांच या औपचारिक प्रक्रिया पूरी की गई। बिना अनुमति और विशेषज्ञ की मौजूदगी के सर्जरी किए जाने के आरोप ने मामले को बेहद गंभीर बना दिया है।
ड्रेसिंग के नाम पर वसूले हजारों रुपये
परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन के बाद महिला को कई बार अस्पताल बुलाया गया और ड्रेसिंग के नाम पर उससे 1000 से 1500 रुपये तक की राशि ली गई। इस तरह कुल मिलाकर करीब 10 हजार रुपये तक की अवैध वसूली किए जाने की बात सामने आई है।
आशा कार्यकर्ता की सतर्कता से खुला मामला
मामले का खुलासा तब हुआ जब एक आशा कार्यकर्ता महिला के घर पहुंची और देखा कि वह अपने शिशु को केवल एक ही स्तन से दूध पिला रही है। संदेह होने पर पूछताछ की गई, जिसके बाद महिला ने पूरी घटना की जानकारी दी। इसके बाद मामला स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों तक पहुंचा और जांच शुरू की गई।
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आरोपी को निलंबित किया
शिकायत मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने तत्काल जांच शुरू की। प्राथमिक जांच में गंभीर लापरवाही और नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर ओटी अटेंडर बरसाती लाल मांझी को निलंबित कर दिया गया है। अधिकारियों के अनुसार, आरोपी को निलंबन अवधि के दौरान सिवनी मालवा अस्पताल में अटैच किया गया है और पूरे मामले की विस्तृत जांच जारी है।