नर्मदापुरम शासकीय गृह विज्ञान (होम साइंस) महाविद्यालय में खेल सामग्री खरीदी के नाम पर हुए लाखों रुपये के कथित घोटाले ने पूरे प्रशासनिक तंत्र को सवालों के घेरे में ला दिया है। तहसीलदार की जांच में चौंकाने वाले खुलासे होने के बाद कोतवाली पुलिस ने सोमवार को कॉलेज की प्राचार्य डॉ. कामिनी जैन समेत चार लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी और शासकीय राशि के दुरुपयोग का मामला दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है। आरोप है कि जिस खेल सामग्री के लिए भुगतान किया गया, वह कॉलेज तक पहुंची ही नहीं थी।
मामले की शुरुआत खेल सामग्री की खरीदी में वित्तीय अनियमितता की शिकायत से हुई थी। कलेक्टर के निर्देश पर तहसीलदार एवं कार्यपालिक दंडाधिकारी सरिता मालवीय ने पूरे प्रकरण की जांच की। जांच रिपोर्ट में सामने आया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में खेलकूद प्रोत्साहन मद से 9 लाख 47 हजार 518 रुपये का भुगतान भोपाल स्थित मेसर्स वैष्णवी इंटरप्राइजेज को कर दिया गया, जबकि संबंधित खेल सामग्री की न तो कॉलेज में आपूर्ति हुई थी और न ही उसका कोई भौतिक सत्यापन किया गया था।
ये भी पढ़ें- एमपीईबी के अतिरिक्त मुख्य अभियंता और कार्यपालन यंत्री 25 हजार रुपये लेते गिरफ्तार, इसलिए मांगी थी घूस
जांच में यह भी सामने आया कि प्राचार्य डॉ. कामिनी जैन की अनुशंसा पर भुगतान की प्रक्रिया पूरी की गई। इतना ही नहीं, बिना सामग्री प्राप्त किए ही उसे कॉलेज के स्टॉक रजिस्टर में दर्ज कर दिया गया। मौके पर जांच के दौरान संबंधित खेल सामग्री उपलब्ध नहीं मिली, जिससे भुगतान प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए। रिपोर्ट के अनुसार 24 जून 2026 को स्टॉक रजिस्टर में दो बिल दर्ज किए गए थे। वहीं, एमपी ट्रेजरी के आईएफएमएस रिकॉर्ड से भुगतान की पुष्टि भी हुई। लेकिन जब जांच टीम ने कॉलेज में सामग्री का भौतिक सत्यापन किया तो रिकॉर्ड और वास्तविक स्थिति में बड़ा अंतर मिला। इसके बाद जांच रिपोर्ट में वित्तीय अनियमितता और शासकीय धन के दुरुपयोग की पुष्टि की गई।
तहसीलदार की रिपोर्ट के आधार पर कोतवाली पुलिस ने अपराध क्रमांक 624/2026 कर तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316(5) और 318(4) के अंतर्गत दर्ज इस मामले में प्राचार्य डॉ. कामिनी जैन, तत्कालीन भंडार शाखा प्रभारी, तत्कालीन लेखा शाखा प्रभारी/लेखापाल और मेसर्स वैष्णवी इंटरप्राइजेज के प्रोप्राइटर को आरोपी बनाया गया है। इस पूरे मामले को सबसे पहले स्थानीय स्तर पर गंभीरता से उठाया गया था। विधायक डॉ. सीतासरन शर्मा ने भी खेल सामग्री खरीदी में गड़बड़ी पर आपत्ति दर्ज कराते हुए कार्रवाई की मांग की थी। इसके बाद प्रशासन ने जांच कराई और रिपोर्ट सामने आने पर एफआईआर दर्ज करने की कार्रवाई शुरू हुई।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रही है। दस्तावेजों, भुगतान प्रक्रिया, स्टॉक रजिस्टर और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है। जांच के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। यह मामला अब केवल वित्तीय अनियमितता तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि शासकीय धन के उपयोग और सरकारी संस्थानों में खरीदी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।