इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से हुई मौतों की घटना के बाद प्रदेशभर में जल की शुद्धता को लेकर सतर्कता बढ़ गई है। इसी बीच रायसेन जिला मुख्यालय में हलाली डैम से सप्लाई होने वाले पानी को लेकर नया और गंभीर विवाद सामने आया है। इस मुद्दे ने अब स्वास्थ्य के साथ-साथ लोगों की धार्मिक आस्था से जुड़ी चिंताओं को भी जन्म दे दिया है।
भोपाल में हाल ही में स्लॉटर हाउस से 26 टन गोमांस पकड़े जाने की घटना के बाद हिंदू संगठनों और जैन समाज ने आरोप लगाया है कि स्लॉटर हाउस से निकलने वाला गंदा पानी, खून और मांस के अवशेष पात्रा नाले के जरिए हलाली डैम में प्रवाहित किए जा रहे हैं।
संगठनों का कहना है कि यही पानी पाइपलाइन के माध्यम से रायसेन नगर तक पहुंच रहा है, जिससे लोगों की आस्था और स्वास्थ्य दोनों पर संकट खड़ा हो गया है। इस मुद्दे को लेकर रायसेन में हिंदू युवा संगठनों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया और पुतला दहन कर हलाली डैम के पानी की आपूर्ति बंद करने की मांग की। वहीं, जैन समाज ने इसे धार्मिक भावनाओं पर सीधा आघात बताते हुए जबलपुर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। समाज के लोगों को उम्मीद है कि न्यायालय से उन्हें शीघ्र राहत मिलेगी।
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गौरतलब है कि पिछले करीब दस वर्षों से हलाली परियोजना के तहत पाइपलाइन के माध्यम से हलाली डैम का पानी रायसेन नगर तक पहुंचाया जा रहा है। लेकिन मौजूदा घटनाक्रम के बाद इस पूरी परियोजना की शुद्धता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि भोपाल नगर निगम द्वारा शहर से निकलने वाले गंदे पानी के लिए पर्याप्त ट्रीटमेंट प्लांट नहीं लगाए गए हैं, जिसके चलते दूषित पानी सीधे नालों के माध्यम से हलाली डैम तक पहुंच रहा है। इस पूरे विवाद ने भोपाल में गोवंश हत्या के मामले को नया आयाम दे दिया है। अब यह मामला केवल कानून और स्वास्थ्य तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि लोगों की आस्था और विश्वास से भी जुड़ गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जब जिला प्रशासन से प्रतिक्रिया ली गई तो रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा ने कहा कि पूरे प्रकरण को संज्ञान में लिया गया है और तथ्यों की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।