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Devotees throng Kubereshwar Dham hotels full Rudraksha distribution to remain suspended
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Rudraksh Mahotsav: कुबेरेश्वर धाम में श्रद्धालु उमड़े, होटल फुल, रुद्राक्ष वितरण रहेगा बंद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर Published by: सीहोर ब्यूरो Updated Fri, 13 Feb 2026 03:06 PM IST
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सीहोर जिले के विश्व प्रसिद्ध कुबेरेश्वर धाम में महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर रुद्राक्ष महोत्सव और शिव महापुराण कथा का आयोजन शुरू हो गया है। देशभर से लाखों श्रद्धालु शामिल होने के लिए पहुंच रहे हैं, जिससे पूरा क्षेत्र शिवमय और भक्तिमय वातावरण में डूब गया है।
देशभर से जुटी श्रद्धालुओं की भीड़
कुबेरेश्वर धाम इस समय किसी महाकुंभ से कम नहीं दिखाई दे रहा। दूर-दूर से आए श्रद्धालुओं की भीड़, हर-हर महादेव के जयकारे, भगवा झंडे और भक्ति गीतों की गूंज ने पूरे क्षेत्र को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया है। 14 फरवरी से 20 फरवरी तक चलने वाले महोत्सव में पहले ही दो दिन में लगभग 1 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंच चुके हैं। आयोजन का संचालन अंतरराष्ट्रीय कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा के मार्गदर्शन में हो रहा है, और उनकी कथा सुनने देश ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी भक्त आ रहे हैं।
आवास और ठहरने की व्यवस्था
महोत्सव के कारण सीहोर शहर के सभी होटल, लॉज, गेस्ट हाउस और धर्मशालाएं पूरी तरह भर चुकी हैं। आसपास के गांवों और कस्बों में भी श्रद्धालु ठहर रहे हैं। कई सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने अपने निजी भवन, स्कूल और सामुदायिक भवन भी श्रद्धालुओं के ठहराव के लिए उपलब्ध कराए हैं।
सेवा कार्य और स्वयंसेवक
विठ्ठलेश सेवा समिति की ओर से 1200 से अधिक स्वयंसेवक देश के अलग-अलग राज्यों से पहुंचे हैं। ये सभी निस्वार्थ भाव से भोजन, पानी, मेडिकल सहायता और मार्गदर्शन जैसी सेवाओं में जुटे हैं। पंडित समीर शुक्ला और पंडित विनय मिश्रा के नेतृत्व में निशुल्क प्रसादी और चाय-नाश्ते की व्यवस्था की गई है।
रुद्राक्ष वितरण इस बार बंद
श्रद्धालुओं के लिए यह स्पष्ट संदेश है कि इस बार रुद्राक्ष वितरण पूरी तरह बंद रहेगा। विठ्ठलेश सेवा समिति ने बताया कि 15 जनवरी से 15 मार्च तक कोई भी रुद्राक्ष नहीं दिया जाएगा। इसका उद्देश्य भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना है।
विशाल पंडाल और बैठने की व्यवस्था
कथा के लिए लगभग 1,80,000 स्क्वायर फीट में भव्य पंडाल तैयार किया गया है, जिसमें एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं के बैठने की सुविधा है। तीन अतिरिक्त पंडाल भी बनाए गए हैं, ताकि कोई खुले आसमान के नीचे न बैठे। प्रत्येक पंडाल में पीने का पानी, पंखे, साउंड सिस्टम और एलईडी स्क्रीन उपलब्ध हैं।
सुरक्षा और आपात व्यवस्था
प्रशासन ने सुरक्षा के लिए 1,235 जवान तैनात किए हैं, जिसमें पुलिस, होमगार्ड और महिला सुरक्षा बल शामिल हैं। पूरे क्षेत्र में सीसीटीवी कैमरे और ड्रोन निगरानी की व्यवस्था है। एसडीएम और पुलिस अधिकारियों को विशेष निर्देश दिए गए हैं कि श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो।
पैदल कॉरिडोर और ट्रैफिक योजना
इस बार पहली बार 8 फीट चौड़ा और लगभग ढाई किलोमीटर लंबा पैदल कॉरिडोर बनाया गया है, जिससे श्रद्धालु सीधे पंडाल और मंदिर परिसर तक पहुंच सकें। इसके अलावा 10 अलग-अलग पार्किंग स्थल चिन्हित किए गए हैं और वाहन चालकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे हाईवे पर वाहन न खड़े करें। भोपाल-इंदौर हाईवे पर दो बड़े ऑटो और बस स्टैंड बनाए गए हैं, जहां से यात्रियों को उतारना और चढ़ाना होगा। भारी वाहनों के लिए भी अलग रूट निर्धारित किए गए हैं।
महाराष्ट्र से आए 500 स्वयंसेवक
मालेगांव, नासिक और जलगांव से 500 से अधिक स्वयंसेवक अपने खर्च पर यहां पहुंचे हैं। संस्था के अध्यक्ष देविदास पाटिल और उपाध्यक्ष राजेंद्र सोनवणे के मार्गदर्शन में ये श्रद्धालुओं की सेवा में दिन-रात जुटे हैं।
अनुशासन और समर्पण
इन स्वयंसेवकों का अनुशासन और एकसमान ड्रेस कोड उन्हें भीड़ में आसानी से पहचानने योग्य बनाता है। पूरे देश से जुड़े 1,000 से अधिक सदस्य बड़े धार्मिक आयोजनों में नियमित सेवा देते हैं।
श्रद्धालुओं का अनुभव
श्रद्धालुओं का कहना है कि यहां आकर उन्हें ऐसा अनुभव हो रहा है जैसे वे किसी दिव्य लोक में पहुंच गए हों। हर व्यक्ति दूसरों की मदद के लिए तत्पर है—कोई रास्ता दिखा रहा है, कोई पानी पिला रहा है, कोई बुजुर्गों को सहारा देकर पंडाल तक पहुंचा रहा है।
प्रशासन और समिति की अपील
प्रशासन और विठ्ठलेश सेवा समिति ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे नियमों का पालन करें, कॉरिडोर में न बैठें, पार्किंग में ही वाहन खड़े करें और किसी अफवाह पर ध्यान न दें। सुरक्षा और सुविधा दोनों को ध्यान में रखते हुए यह महोत्सव ऐतिहासिक और अविस्मरणीय बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
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