अभी अप्रैल का महीना चल रहा है और जिले में अनेक गांव भीषण जलसंकट की चपेट में आ गए हैं। जिला मुख्यालय के समीपस्थ ग्राम खामलिया में हालत इतने गंभीर हो गए हैं कि गांव के सभी एक दर्जन हैंडपंपों के कंठ पूरी तरह से सूख चुके हैं। गांव की नल-जल योजना बंद पड़ी है। भीषण पेयजल से परेशान गांव के 50 परिवार के लोगों ने गांव छोड़ दिया है और वह अपने रिश्तेदारों के घरों पर पलायन कर चुके हैं। गांव में एक-एक लौटे पानी के लिए ग्रामीण जद्दोजहद कर रहे हैं।
जिला मुख्यालय से करीब 15 किमी दूर स्थित ग्राम खामलिया में भीषण जलसंकट ने ग्रामीणों की नींद उड़ा दी है। गांव में जलसंकट तो कई वर्षों से है, लेकिन इस साल समस्या अधिक गंभीर हो गई है। पेयजल के लिए ग्रामीण दिन रात एक कर रहे हैं। इसके बाद भी पानी की व्यवस्था मुश्किल से हो पा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में लगे सभी हैंडपंप ने दम तोड़ दिया है और नलकूप नाकारा हो गए हैं। गांव के कुओं की हालत भी यही है। गांव में घर-घर नल-जल योजना के नल तो लगे हैं, लेकिन उनमें पानी नहीं आता है। गांव में पानी का कोई अन्य स्रोत नहीं है। पानी के लिए त्राहि-त्राहि मची हुई है। जिससे कई ग्रामीण पलायन कर गए हैं।
घरों पर लटक गए ताले, गांव से हो रहा पलायन
खामलिया गांव की आबादी करीब तीन हजार है। जल संकट का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि गांव के लोग दिन-प्रतिदिन गांव छोड़कर अन्य गांवों में या शहरों में पलायन करने पर मजबूर हो गए हैं। गांव के मुकेश पटेल, सजन सिंह, राकेश मेवाड़ा ने बताया कि गांव में भीषण जलसंकट की स्थिति निर्मित हो गई है। ग्रामीण एक-एक बाल्टी पानी के लिए परेशान हो रहे हैं। जल संकट के चलते गांव के 50 से अधिक परिवार गांव छोड़कर पलायन कर चुके हैं और उनके घरों पर ताले लटक गए हैं। गांव छोड़कर जाने वालों की संख्या में प्रतिदिन वृद्धि हो रही है।
गांव में आधा दर्जन हैंडपंप, लेकिन पानी एक में भी नहीं
ग्रामीणों ने बताया कि गांव में पेयजल के लिए आधा दर्जन हैंडपंप ही सहारा है। गांव के कुएं गर्मी आने के पहले ही सूख चुके हैं। गांव के हैंडपंपों ने भी पिछले करीब एक माह से पूरी तरह से साथ छोड़ दिया है। ग्रामीणों का कहना है पानी के लिए काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। पेयजल के लिए ग्रामीण दूसरे गांव पर आश्रित हैं। जिनके पास साधन है। वह अपने साधनों से दूसरे गांव से पानी भरकर ला रहे हैं, लेकिन जिनके पास साधन नहीं है। उन्हें पानी के लिए दिन-रात एक करना पड़ रहा है।
गांव में हैंडपंप खनन के आदेश हुए, लेकिन खुदे नहीं
ग्रामीणों की मानें तो गांव में जलसंकट को लेकर पीएचई मंत्री सहित वरिष्ठ अधिकारियों को करीब डेढ़ माह पहले ही शिकायत की जा चुकी है। शिकायत के बाद गांव में तीन हैंडपंप खनन के आदेश भी जारी हो चुके हैं, लेकिन अभी तक हैंडपंप खनन का कार्य नहीं हो सका है। इसके चलते गांव में जलसंकट ने विकराल रूप ले लिया है। समाजसेवी एमएस मेवाड़ा ने कहा कि गांव की जल समस्या का निवारण हैंडपंप खनन से नहीं होगा। गांव के तालाब का गहरीकरण, कुओं की सफाई, जल सरंक्षण के तहत स्टापडेम आदि का भी निर्माण किया जाना चाहिए।
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पांच रुपए में एक कुप्पा मिल रहा गांव में पानी
पेयजल संकट की स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि गांव में पांच रुपए में एक कुप्पा पानी मिल रहा है। कुछ लोग दूसरे गांवों से टैंकरों के माध्यम से पानी लाकर गांव में बेच रहे हैं। ग्रामीण भी मजबूरी में पानी खरीदने पर मजबूर हैं। गांव की चतर बाई, देव बाई, सौरम बाई ने बताया कि लाड़ली बहनों की मिलने वाली राशि पानी खरीदने पर जा रही है। इसके बाद भी पानी का इंतजाम नहीं हो पा रहा है।
जल संकट से निपटने कर रहा है प्रयास
इस संबंध में ग्राम सरपंच कुलदीप सिंह राजपूत का कहना है कि गांव में पांच हैंडपंप हैं, जिनमें से तीन पूरी तरह सूख चुके हैं। बाकी दो में भी थोड़ा-बहुत ही पानी बचा है। चार कुएं थे, वो भी सूख चुके हैं। तीन बोर के लिए आवेदन दिए हैं। इस संबंध में जिला पंचायत सीईओ नेहा जैन ने बताया कि मामले की जानकारी मिली है। यहां पानी की समस्या बनी हुई है। हम लोग पीएचई के साथ इस क्षेत्र की जांच करेंगे। बोरिंग के आवेदन पर पीएचई काम कर रहा है।