उज्जैन में गंगा दशहरा को लेकर एक बड़ा धार्मिक आयोजन होने जा रहा है। इस मौके पर हरिद्वार से गंगाजल लाकर बाबा महाकाल का अभिषेक किया जाएगा। खास बात यह है कि गंगाजल सवारी रथ के जरिए भव्य शोभायात्रा के रूप में हरिद्वार से उज्जैन तक लाया जाएगा।
यह घोषणा श्री पंचायती निरंजनी अखाड़े में आयोजित कार्यक्रम के दौरान अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रवींद्र पुरी महाराज ने की। उन्होंने बताया कि अखाड़ा परिषद के महामंत्री हरि गिरि महाराज के नेतृत्व में गंगा दशहरा पर यह आयोजन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हरिद्वार से कई क्विंटल गंगाजल लाया जाएगा और उसी जल से बाबा महाकाल का अभिषेक किया जाएगा। यह आयोजन आस्था और परंपरा का बड़ा प्रतीक होगा।
रवींद्र पुरी महाराज ने बताया कि अभी पहला कदम महाकाल मंदिर से शुरू किया जा रहा है। इसके बाद अगले साल से पूरे देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में जाकर गंगाजल से अभिषेक करने की योजना है। उन्होंने कहा कि यही हरि गिरि महाराज का सपना और सोच है, जिसे आगे बढ़ाया जाएगा।
कन्या पूजन और संतों का भव्य समागम
बड़नगर रोड स्थित श्री पंचायती निरंजनी अखाड़े में कन्या पूजन का भव्य आयोजन भी किया गया। इस दौरान रवींद्र पुरी महाराज, हरि गिरि महाराज सहित कई संत-महात्मा मौजूद रहे। संतों और श्रद्धालुओं ने नवदुर्गा स्वरूप कन्याओं का पूजन किया और उनसे आशीर्वाद लिया। कार्यक्रम में कन्याओं के चरण धोकर उन्हें चुनरी, प्रसाद और उपहार दिए गए।
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रवींद्र पुरी महाराज ने खुद कन्याओं का पूजन कर उनका आशीर्वाद लिया और कहा कि सनातन परंपरा में कन्या को देवी का रूप माना जाता है। इस मौके पर कई अखाड़ों के संत मौजूद रहे, जिनमें जूना अखाड़ा, आह्वान अखाड़ा और महानिर्वाणी अखाड़ा के संत शामिल थे। बड़ी संख्या में श्रद्धालु भी कार्यक्रम में पहुंचे। शाम को सुंदरकांड पाठ हुआ और देर रात तक महाप्रसाद का आयोजन चलता रहा।
सनातन धर्म देता है एकता और समरसता का संदेश
कार्यक्रम के दौरान रवींद्र पुरी महाराज ने कहा कि सनातन धर्म सभी को साथ लेकर चलने की सीख देता है। अखाड़ा परिषद हमेशा समाज को जोड़ने का काम करती रही है और किसी तरह का भेदभाव नहीं करती। संतों ने कहा कि ऐसे आयोजन समाज में भाईचारा, एकता और आध्यात्मिक ऊर्जा बढ़ाते हैं। कन्या पूजन जैसे कार्यक्रम नई पीढ़ी को संस्कारों से जोड़ने का काम करते हैं। रवींद्र पुरी महाराज ने बताया कि अखाड़ा परिषद ने अलग-अलग वर्गों के संतों को सम्मान देकर उन्हें महामंडलेश्वर और जगतगुरु जैसे पदों पर स्थापित किया है। इससे समाज में समानता और समरसता को मजबूती मिली है।
अखाड़ा परिषद में ‘वर्चस्व’ की जंग: रवींद्र पुरी महाराज का तीखा प्रहार
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष पद को लेकर जारी विवाद अब और गहराता जा रहा है। परिषद के दो धड़ों के बीच खींचतान अब ‘शत्रु नाश’ की प्रार्थनाओं तक पहुंच गई है। निरंजनी अखाड़े के श्रीमहंत रवींद्र पुरी महाराज ने एक बार फिर कड़े तेवर दिखाते हुए विरोधियों पर निशाना साधा।
नगर पूजा और धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान मीडिया से चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि मां भगवती से प्रार्थना की गई है कि जो लोग आगामी कुंभ मेले की गरिमा और व्यवस्था में बाधा डालना चाहते हैं, उनका नाश हो। हालांकि उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके बयान को महानिर्वाणी अखाड़े के उस गुट की ओर इशारा माना जा रहा है, जो खुद को अध्यक्ष बता रहा है।
रवींद्र पुरी महाराज ने दो अध्यक्षों के विवाद पर चुटकी लेते हुए कहा कि पद न मिलने की हताशा में कुछ लोगों की मानसिकता कमजोर हो गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अखाड़ा परिषद का वास्तविक नेतृत्व प्रयागराज कुंभ के समय ही तय हो चुका है और नासिक कुंभ के बाद विधिवत चुनाव प्रक्रिया पूरी होगी।
दो अध्यक्षों के दावे पर प्रतिक्रिया
जब उनसे दो-दो अध्यक्ष होने के दावे पर सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा कि प्रयागराज कुंभ से उनकी पहचान पूरे देश में स्थापित है, जबकि कुछ लोग नासिक में भंडारे के नाम पर खुद को अध्यक्ष घोषित कर बैठे। उन्होंने दोहराया कि चुनाव प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और जो भी आगामी कुंभ में बाधा डालने की कोशिश करेगा, उसका अंत तय है।
उज्जैन में सिंहस्थ कुंभ से पहले अतिक्रमण हटाने के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि इस संबंध में वे मुख्यमंत्री से चर्चा करेंगे। यह मार्ग प्राचीन परंपरा से जुड़ा है और यहां बने ढांचों को लेकर सरकार से बातचीत की जाएगी। अतिक्रमण हटाना आवश्यक है।
इसी वजह से बढ़ा विवाद
उज्जैन में अखाड़ा राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। हाल ही में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष पद को लेकर विवाद खुलकर सामने आया। वर्तमान में परिषद में दो अध्यक्ष होने के दावे किए जा रहे हैं। एक ओर महानिर्वाणी अखाड़े से जुड़े रवींद्र पुरी महाराज हैं, जिन्हें 8 अखाड़ों का समर्थन बताया जा रहा है, जबकि दूसरी ओर निरंजनी अखाड़े के रवींद्र पुरी महाराज हैं, जिन्हें 5 अखाड़ों का समर्थन मिलने का दावा है। इसी कारण स्थिति असमंजसपूर्ण बनी हुई है और विवाद लगातार गहराता जा रहा है।