कालों के काल बाबा महाकाल के दरबार में आज सुबह भारतीय क्रिकेटर नीतीश कुमार रेड्डी बाबा महाकाल की अद्भुत और अद्वितीय भस्म आरती देखने पहुंचे, जहां उन्होंने बाबा महाकाल के निराकार से साकार स्वरूप के दर्शन किए और बाबा महाकाल की भक्ति में लीन हो गए। बाबा महाकाल के पहली बार दर्शन करने पहुचे भारतीय क्रिकेटर नीतीश कुमार रेड्डी भस्म आरती के दौरान कभी तालियां बजाते हुए तो कभी जय श्री महाकाल का उद्घोष करते हैं हुए नजर आए। भस्म आरती के बाद आपने चांदी द्वार से बाबा महाकाल का पूजन अर्चन और जलाभिषेक किया इसके बाद नंदी जी के कानों में अपनी मनोकामना भी कही।
श्री महाकालेश्वर मंदिर के सहायक प्रशासक आशीष फलवाडिया ने बताया कि कालों के काल बाबा महाकाल के दरबार में आज भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ी नीतीश कुमार रेड्डी बाबा महाकाल के दर्शन करने पहुंचे थे। आपने बताया कि भस्म आरती के दौरान नीतीश ने अपने मस्तक पर त्रिपुंड बनवाया था और नंदी हॉल में बैठकर बाबा महाकाल की भक्ति में लीन भी दिखाई दिए। भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ी ने प्रातःकालीन भस्म आरती में ज्योतिर्लिंग भगवान श्री महाकालेश्वर के दर्शन लाभ लिए। दर्शन उपरांत मंदिर समिति की ओर से नीतीश कुमार रेड्डी का स्वागत एवं सत्कार किया गया।
बेटे का क्रिकेट करियर बनाने के लिए पिता ने छोड़ दी थी नौकरी
नीतीश कुमार रेड्डी एक क्रिकेटर हैं। वह जो घरेलू क्रिकेट में आंध्र और इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में सनराइजर्स हैदराबाद के लिए खेलते हैं। उन्होंने 27 जनवरी 2020 को आंध्र के लिए 2019-20 रणजी ट्रॉफी में अपना फर्स्ट क्लास डेब्यू किया। रेड्डी ने 20 फरवरी 2021 को आंध्र के लिए 2020-21 विजय हजारे ट्रॉफी में अपना लिस्ट ए डेब्यू किया। उन्होंने 4 नवंबर 2021 को आंध्र के लिए 2021-22 सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में अपना ट्वेंटी 20 डेब्यू किया। उन्हें 2023 इंडियन प्रीमियर लीग की ऑक्शन में सनराइजर्स हैदराबाद ने 20 लाख रुपये में खरीदा था। नीतीश ने 6 अक्टूबर 2024 को अपना टी20 डेब्यू किया और 2024-25 बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के दौरान 22 नवंबर 2024 को भारत के लिए टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू किया। नीतीश कुमार रेड्डी का जन्म 26 मई 2003 को विशाखापत्तनम में हुआ था। वे हिंदुस्तान जिंक के पूर्व कर्मचारी मुत्याला रेड्डी के बेटे हैं। नीतीश ने 5 साल की उम्र में प्लास्टिक के बल्ले से क्रिकेट खेलना शुरू किया और सीनियर खिलाड़ियों को क्रिकेट खेलते देखने के लिए नियमित रूप से हिंदुस्तान जिंक के मैदान पर जाते थे। अपने पिता के सहयोग से, जिन्होंने उदयपुर में ट्रांसफर होने पर अपनी नौकरी छोड़ दी थी, ताकि अपने बेटे को क्रिकेट करियर बनाने में मदद कर सकें।