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Sehore News: Sea of Devotees on Mauni Amavasya, Crowds from Narmada Ghats to Salkanpur Dham, Traffic Jammed
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Sehore News: मौनी अमावस्या पर उमड़ा आस्था का सैलाब, नर्मदा घाट से सलकनपुर धाम तक श्रद्धालुओं की भीड़, जाम लगा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर Published by: सीहोर ब्यूरो Updated Sun, 18 Jan 2026 10:43 PM IST
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माघ मास की पावन मौनी अमावस्या पर रविवार को सीहोर जिला पूरी तरह भक्ति और श्रद्धा में डूबा नजर आया। अलसुबह करीब पांच बजे से ही श्रद्धालुओं ने मां नर्मदा व पवित्र नदियों में आस्था की डुबकी लगाना शुरू कर दिया। कड़ाके की ठंड के बावजूद श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी। घाटों पर हर-हर नर्मदे और नर्मदा हर के जयघोष गूंजते रहे, जिससे पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा।
जिले के नीलकंठ घाट, आंवली घाट, सीलकंठ सहित अन्य नर्मदा घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। खासतौर पर नीलकंठ घाट और आंवली घाट श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बने रहे। भैरूंदा तहसील के पास स्थित नीलकंठ घाट पर भगवान शिव के नीलकंठेश्वर स्वरूप का प्राचीन और सिद्ध मंदिर स्थित है। मान्यता है कि यहां मां नर्मदा में स्नान और भगवान नीलकंठेश्वर के दर्शन से जन्म-जन्मांतर के कष्ट समाप्त हो जाते हैं।
मौनी अमावस्या पर नर्मदा स्नान के लिए सीहोर, नर्मदापुरम के अलावा हरदा, इटारसी, बैतूल, भोपाल, विदिशा, बीना, छिंदवाड़ा सहित कई जिलों और शहरों से बड़ी संख्या में महिला-पुरुष श्रद्धालु पहुंचे। घाटों पर श्रद्धालु स्नान के साथ-साथ पूजन-पाठ, कथा, तर्पण और दान-पुण्य करते नजर आए। धार्मिक विद्वानों के अनुसार इस दिन मौन रहकर स्नान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है, जो कभी समाप्त नहीं होता।
नर्मदा स्नान के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु देवीधाम सलकनपुर में मां बीजासन के दर्शन के लिए पहुंचे। माघ अमावस्या के अवसर पर सलकनपुर धाम में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। रविवार को करीब दो लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने मातारानी के दर्शन किए। मंदिर परिसर और आसपास का क्षेत्र भक्तों से खचाखच भरा रहा।
रोप वे बंद, सीढ़ी और सड़क मार्ग पर लगा जाम
इस दौरान सलकनपुर धाम में मां बीजासन रोप वे सेवा अस्थायी रूप से बंद रहने से श्रद्धालुओं को खासी परेशानी का सामना करना पड़ा। तकनीकी रखरखाव के चलते इसे 16 से 20 जनवरी तक बंद रखा गया है। रोप वे बंद होने से श्रद्धालुओं को सीढ़ी और सड़क मार्ग से दर्शन करने पड़े, जिससे दोनों मार्गों पर घंटों जाम की स्थिति बनी रही।
मौनी अमावस्या का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माघ मास की अमावस्या को मौनी अमावस्या कहा जाता है। शिवपुराण सहित अन्य ग्रंथों में इस तिथि का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, दान-पुण्य और मौन व्रत का विधान है। मान्यता है कि इस दिन दान करने से ग्रह दोष समाप्त होते हैं और पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है।
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