मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक रोमांचक दृश्य सामने आया। पतौर परिक्षेत्र की पनपथा बीट में शुक्रवार सुबह वन विभाग के फील्ड स्टाफ को गश्त के दौरान 12 सोनकुत्तों का एक झुंड तालाब के किनारे पानी पीते हुए दिखाई दिया। जैसे ही इसकी सूचना वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई, उन्होंने इस दुर्लभ दृश्य को वन्यजीव संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया।
दुर्लभ प्रजाति के सोन कुत्ते
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व प्रबंधन के अनुसार, सोन कुत्ते अत्यंत दुर्लभ वन्यजीवों में गिने जाते हैं। ये आमतौर पर किसी एक निश्चित स्थान पर नहीं रहते, बल्कि पूरे जंगल में झुंड के साथ घूमते रहते हैं। इनकी गिनती शीर्ष शिकारी जीवों में होती है और ये जंगल के पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जंगल में शिकार के स्वाभाविक संतुलन को बनाए रखने में इनकी अहम भूमिका होती है।
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बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में सोन कुत्तों की मौजूदगी
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व अपने बाघों, तेंदुओं, भालुओं और अन्य दुर्लभ प्रजातियों के लिए प्रसिद्ध है। यहां समय-समय पर सोन कुत्तों का झुंड भी देखा जाता है, लेकिन इनकी संख्या बहुत सीमित है। विशेषज्ञों के अनुसार, पतौर, मानपुर और धमोखर रेंज में कभी-कभी इनका झुंड दिखाई देता है। लेकिन, यह पहली बार है कि इतनी बड़ी संख्या में सोन कुत्तों को एक साथ देखा गया है।
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वन्यजीव संरक्षण के संकेत
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी जंगल में सोन कुत्तों की उपस्थिति यह दर्शाती है कि वहां की जैव विविधता संतुलित है। इनका दिखना यह भी संकेत देता है कि जंगल में शिकार की पर्याप्त उपलब्धता है और वन्यजीव संरक्षण प्रयास सफल हो रहे हैं। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने इस दुर्लभ घटना को दर्ज कर लिया है और आगे भी इनकी निगरानी करने की योजना बना रहा है।