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पहली हाउस मीटिंग में हंगामा: 12.08 करोड़ के ड्रेनेज प्रोजेक्ट पर आप-भाजपा आमने-सामने
नगर परिषद जगराओं की नई परिषद की पहली ही हाउस बैठक विवादों और राजनीतिक तकरार के बीच सुर्खियों में रही। बैठक शुरू होते ही उस समय माहौल गरमा गया जब परिषद प्रधान कवरपाल ने पत्रकारों को बैठक कक्ष से बाहर जाने के लिए कहा। इस फैसले का कई पार्षदों ने खुलकर विरोध किया। विरोध बढ़ता देख प्रधान को अपना फैसला वापस लेना पड़ा और पत्रकारों को दोबारा बैठक में बैठने की अनुमति देनी पड़ी। इस दौरान पूर्व नगर परिषद प्रधान एवं वर्तमान पार्षद जतिंदर पाल राणा ने टिप्पणी करते हुए कहा, "हाउस में दोहरी नीति नहीं चलेगी।"
बैठक में कुल 14 एजेंडा रखे गए। शुरुआती पांच प्रस्ताव मामूली नोकझोंक के बीच पारित हो गए, लेकिन छठे प्रस्ताव से विवाद शुरू हो गया। यह मामला शहर में लगे कूड़े के ढेर और धारा-35 के तहत खर्च की गई राशि को लेकर था। विपक्षी पार्षदों ने सवाल उठाया कि पहले 10-12 लाख रुपये में पूरे शहर से कूड़ा उठाकर सफाई कर दी जाती थी, जबकि अब करीब 50 लाख रुपये खर्च होने के बावजूद शहर में जगह-जगह कूड़े के पहाड़ लगे हुए हैं। इस मुद्दे पर परिषद प्रधान से जवाब मांगा गया।
12.08 करोड़ के ड्रेनेज प्रोजेक्ट पर आप-भाजपा आमने-सामने
बैठक का सबसे बड़ा विवाद कमल चौक क्षेत्र की बरसाती पानी निकासी के लिए तैयार किए गए 12.08 करोड़ रुपये के संशोधित डीपीआर पर हुआ। भाजपा के वरिष्ठ उपप्रधान सतीश कुमार पप्पू ने कहा कि परियोजना की कुल लागत में 80 प्रतिशत यानी 9.66 करोड़ रुपये केंद्र सरकार और 20 प्रतिशत यानी 2.42 करोड़ रुपये नगर परिषद खर्च करेगी। उन्होंने कहा कि इस योजना में पंजाब सरकार का कोई वित्तीय योगदान नहीं है।
इस बयान पर आम आदमी पार्टी के पार्षदों ने कड़ा विरोध किया। उनका कहना था कि पंजाब से एकत्र किए गए टैक्स का हिस्सा ही केंद्र सरकार विकास योजनाओं के लिए वापस देती है, इसलिए इसका राजनीतिक श्रेय लेने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। दोनों पक्षों के बीच काफी देर तक तीखी बहस चली।
राणा बोले- पहले मशीनें पंजाब सरकार की उपलब्धि बताई जाती थीं
पूर्व परिषद प्रधान व पार्षद जतिंदर पाल राणा ने भी भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि जब केंद्र सरकार ने शहर की सफाई के लिए करोड़ों रुपये की मशीनें उपलब्ध करवाई थीं, तब उन्हें पंजाब सरकार की उपलब्धि बताया गया था। अब वही लोग केंद्र सरकार का श्रेय लेकर राजनीति कर रहे हैं।
हालांकि कुछ पार्षदों ने कहा कि जनता के लिए यह महत्वपूर्ण नहीं है कि पैसा केंद्र दे या राज्य सरकार, बल्कि शहर की जलभराव जैसी पुरानी समस्या का स्थायी समाधान होना चाहिए।
पप्पू और नोनी के बीच तीखी बहस
बरसाती पानी निकासी के मुद्दे पर भाजपा के वरिष्ठ उपप्रधान सतीश कुमार पप्पू और आप पार्षद गुरप्रीत सिंह नोनी के बीच भी तीखी नोकझोंक हुई। नोनी ने अपने वार्ड में भी ड्रेनेज व्यवस्था की मांग रखी, जिस पर पप्पू ने पहले कमल चौक की समस्या हल करने की बात कही। इसके बाद दोनों नेताओं के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। अन्य पार्षदों के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत हुआ।
जनगणना भुगतान पर भी उठा विवाद
एजेंडा नंबर-14 में जनगणना प्रशिक्षण शिविरों के 4.36 लाख रुपये के बकाया भुगतान का प्रस्ताव भी विवादों में रहा। कांग्रेस पार्षदों ने कहा कि जनगणना केंद्र सरकार का कार्यक्रम है, इसलिए इसका भुगतान भी केंद्र सरकार को ही करना चाहिए। नगर परिषद के फंड से यह राशि जारी नहीं की जानी चाहिए।
'सेटिंग के लिए और भी कमरे हैं' टिप्पणी से फिर गरमाया माहौल
हाउस में सीसीटीवी कैमरे लगाने का मुद्दा उठाते हुए पूर्व प्रधान जतिंदर पाल राणा ने कहा कि पारदर्शिता के लिए बैठक की रिकॉर्डिंग होनी चाहिए। इस पर आप पार्षद जगजीत सिंह जग्गी ने तंज कसते हुए कहा, "हाउस में तो कैमरे लग जाएंगे, लेकिन सेटिंग करने के लिए नगर परिषद में और भी कई कमरे बने हुए हैं।" इस टिप्पणी के बाद सदन में फिर कुछ देर के लिए हंगामे जैसी स्थिति बन गई।
आवारा कुत्तों की नसबंदी का मुद्दा भी उठा
पार्षद दविंदरजीत सिद्धू ने शहर में बढ़ते आवारा कुत्तों के आतंक का मुद्दा उठाते हुए कहा कि नसबंदी को लेकर कई बार प्रस्ताव पास किए जा चुके हैं, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि आए दिन लोग कुत्तों के काटने का शिकार हो रहे हैं। नगर परिषद को जल्द नसबंदी अभियान चलाने के साथ-साथ डॉग शेल्टर भी बनाना चाहिए।
पहली बैठक से ही मिले राजनीतिक संकेत
नगर परिषद की पहली ही बैठक में विकास कार्यों से ज्यादा राजनीतिक बयानबाजी, आरोप-प्रत्यारोप और तीखी बहसें देखने को मिलीं। पत्रकारों को बाहर भेजने की कोशिश, कूड़े के ढेर, 12.08 करोड़ के ड्रेनेज प्रोजेक्ट, जनगणना भुगतान और आवारा कुत्तों के मुद्दों पर हुए विवाद ने साफ संकेत दे दिए कि आने वाले समय में नगर परिषद की राजनीति काफी गर्म रहने वाली है।
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