श्रावण मास के पवित्र अवसर पर जहां देशभर में कांवड़ यात्रा का माहौल चरम पर है, वहीं अलवर जिले के उमरैण गांव निवासी हरिराम भगत ने आस्था की अनोखी मिसाल पेश की है। उन्होंने हरिद्वार से 11 किलो वजनी भगवान शिव की प्रतिमा को अपने कंधे पर उठाकर सैकड़ों किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा पूरी कर ली है। यह यात्रा सिर्फ दूरी का नहीं, बल्कि एक सच्चे श्रद्धालु की भक्ति, निष्ठा और संकल्प का प्रतीक बन गई है।
हर साल लाते हैं कांवड़, इस बार लाए भगवान शिव की प्रतिमा
हरिराम भगत ने बताया कि वह हर साल श्रावण में कांवड़ लाकर भगवान शिव को जल अर्पित करते हैं, लेकिन इस बार उनका संकल्प कुछ विशेष था। उन्होंने हरिद्वार से भगवान शिव की प्रतिमा लेकर पैदल यात्रा शुरू की, ताकि इसे अपने गांव उमरैण में किसी शिव मंदिर में विधिवत स्थापित किया जा सके। उन्होंने कहा कि मेरी इच्छा है कि यह मूर्ति मेरे गांव के मंदिर में स्थापित हो और लोग रोज भगवान के दर्शन कर सकें। प्रतिमा के साथ यात्रा करते हुए उन्हें कई बार कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, लेकिन भक्ति में लीन हरिराम की आस्था डगमगाई नहीं।
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लोगों ने किया स्वागत, गूंजे 'बम बम भोले' के नारे
हरिद्वार से अलवर तक की इस कठिन यात्रा के दौरान जहां-जहां हरिराम पहुंचे, वहां श्रद्धालुओं ने उन्हें हाथ जोड़कर नमन किया। कई स्थानों पर लोगों ने उनके भक्ति भाव को सराहते हुए 'बम बम भोले' के जयकारे लगाए और रास्ते में उन्हें फल, पानी आदि देकर सहयोग भी किया। उनकी यह यात्रा सिर्फ धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि समाज के लिए एक प्रेरणादायी संदेश बन गई है।
उमरैण में होगी स्थापना, मंदिर का चयन बाकी
हरिराम भगत फिलहाल अलवर जिले में प्रवेश कर चुके हैं और आज शाम या कल सुबह तक अपने गांव उमरैण पहुंचने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि प्रतिमा को गांव के किसी शिव मंदिर में ही स्थापित किया जाएगा, हालांकि अभी मंदिर का अंतिम चयन नहीं हुआ है। जैसे ही मंदिर तय होगा, विधिवत पूजा-अर्चना और वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ प्रतिमा की स्थापना की जाएगी।
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