राजस्थान की अलवर पुलिस ने एक बड़ी साइबर अपराध कार्रवाई कर क्रिकेट और ऑनलाइन सट्टेबाजी से जुड़े एक हाई-प्रोफाइल गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस गिरोह के तार न केवल देश के विभिन्न राज्यों से जुड़े हैं, बल्कि इसके संचालन का दायरा अंतरराष्ट्रीय स्तर तक फैला हुआ है। पुलिस ने इस ऑपरेशन के दौरान एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर समेत तीन युवकों को गिरफ्तार किया है, जो कथित रूप से करीब 150 करोड़ रुपये के अवैध लेनदेन में शामिल थे।
महादेव एप से प्रेरित, खुद का सट्टा नेटवर्क खड़ा किया
गिरफ्तार किए गए युवकों ने महादेव सट्टेबाजी एप की तर्ज पर खुद की सट्टा वेबसाइटें विकसित की थीं। पुलिस की जांच में सामने आया कि इस गिरोह ने कुल 30 से ज्यादा वेबसाइटें तैयार कीं, जिनके माध्यम से क्रिकेट मैच, आईपीएल, कसीनो और मटका जैसे जुए के खेलों पर सट्टा खिलाया जा रहा था। इन प्लेटफॉर्म्स पर 60,000 से अधिक आईडी सक्रिय थीं, जिनमें सबसे अधिक उपयोगकर्ता उत्तरप्रदेश से जुड़े पाए गए।
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तकनीकी निगरानी और संयुक्त कार्रवाई से सफलता
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. तेजपाल सिंह ने बताया कि साइबर सेल को मिली गोपनीय सूचना के आधार पर एक विशेष टीम का गठन किया गया, जिसमें उद्योग नगर थाना पुलिस और साइबर विशेषज्ञों की संयुक्त भागीदारी रही। तकनीकी विश्लेषण और ट्रैकिंग के माध्यम से पुलिस ने तीन आरोपियों को धर दबोचा।
गिरफ्तार युवकों में नितिन पालीवाल (पुत्र ओमप्रकाश पालीवाल), महेश शर्मा (पुत्र राम नगीना शर्मा) और पीयूष शर्मा (पुत्र ओमप्रकाश शर्मा) शामिल हैं। नितिन पालीवाल इस गिरोह का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है, जिसने कोरोना काल में बेरोजगारी के दौरान 2021 में यह नेटवर्क खड़ा किया था।
ऑनलाइन सट्टे की कमाई से आलीशान क्लब और प्रॉपर्टी
पुलिस की पूछताछ में यह भी सामने आया है कि इस गिरोह ने ऑनलाइन सट्टेबाजी से कमाए गए पैसों से अलवर में डग आउट स्पोर्ट्स क्लब की स्थापना की। इसके अलावा हाल ही में इन्होंने 2500 वर्ग गज का एक प्लॉट भी खरीदा है। शालीमार क्षेत्र में इनका एक फ्लैट भी मौजूद है, जिसकी जांच की जा रही है।
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बड़ी कार्रवाई की ओर बढ़ रही पुलिस
अभी तक की कार्रवाई में पुलिस ने आरोपियों के पास से छह एंड्रॉयड मोबाइल फोन, दो लैपटॉप, एक हार्ड ड्राइव, 15 एटीएम कार्ड और एक एसयूवी कार जब्त की है। फिलहाल तीनों आरोपियों को छह जून तक पुलिस रिमांड पर लिया गया है और उनसे गहन पूछताछ की जा रही है। पुलिस का मानना है कि यह गिरोह किसी और बड़े सट्टा सिंडिकेट से भी जुड़ा हो सकता है। अलवर पुलिस ने आयकर विभाग सहित अन्य जांच एजेंसियों को भी इसकी जानकारी दे दी है ताकि इस अवैध लेनदेन की गहराई से जांच की जा सके।
अलवर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. तेजपाल सिंह ने कहा कि यह अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई है, जो साइबर अपराध और अवैध सट्टेबाजी के खिलाफ हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। हम इस नेटवर्क की हर परत को खोलने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।