अलवर में मत्स्य औद्योगिक क्षेत्र स्थित एक कंपनी में काम करने वाले युवक की पानी के कुंडे में डूबने से हुई मौत के बाद परिजनों ने कंपनी गेट के बाहर धरना देकर मुआवजे की मांग की। शुरुआत में परिजनों ने दलित उत्पीड़न और भेदभाव का आरोप लगाया था, जिससे मामला तूल पकड़ता नजर आ रहा था लेकिन बाद में मुआवजे पर सहमति बनने के बाद परिजनों ने अपने बयान बदल लिए। गौरतलब है कि कंपनी द्वारा 12 लाख 50 हजार रुपये मुआवजा देने पर सहमति बनी है।
घटना उद्योग नगर थाना क्षेत्र की है, जहां केरवा जाट गांव निवासी राजू एक निजी कंपनी में कार्यरत था। रविवार को काम के दौरान वह पानी के कुंडे में गिर गया, जिससे उसकी मौत हो गई। सोमवार सुबह पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम करवाया।
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मृतक के परिजनों ने पहले आरोप लगाया था कि उनके बेटे के साथ जातिगत भेदभाव हुआ है और यह मामला दलित उत्पीड़न से जुड़ा है। हालांकि बाद में कंपनी प्रबंधन के साथ बातचीत और साढ़े बारह लाख रुपये के मुआवजे पर सहमति बनने के बाद परिजनों ने बयान दिया कि राजू की मौत एक हादसा थी, जो पैर फिसलने से हुआ। इस घटनाक्रम ने पुलिस को भी असमंजस में डाल दिया। पहले पुलिस को अंदेशा था कि मामला गंभीर है और वह कंपनी पर कड़ी कार्रवाई और जुर्माने की दिशा में बढ़ रही थी, लेकिन परिजनों के बदले बयान से अब मामले का रुख पूरी तरह बदल गया।
फिलहाल पुलिस यह जांच कर रही है कि यह हादसा वास्तव में दुर्घटनावश हुआ या कंपनी की किसी लापरवाही का नतीजा था। परिजनों का कहना है कि शुरू में उन्हें शक था कि राजू के साथ भेदभाव हुआ है, लेकिन बाद में कंपनी से बातचीत और तथ्यों की जानकारी के बाद यह स्पष्ट हो गया कि यह एक दुर्भाग्यपूर्ण हादसा था और मुआवजे के रूप में उन्हें संतोषजनक सहायता भी मिल चुकी है।