झालावाड़ में हाल ही में स्कूल की छत गिरने की घटना के बाद बाड़मेर शहर के गांधी नगर स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय के छात्र और अभिभावक भी गहरे डर में हैं। वजह है- इस स्कूल की भी जर्जर हालत और गिरती छत, जिससे बच्चों की जान को हर रोज खतरा बना हुआ है। विद्यालय भवन की छतें बेहद खराब स्थिति में हैं। आए दिन छत से कंकड़-पत्थर नीचे गिरते रहते हैं, जिससे भय का माहौल बना हुआ है। शिक्षकों ने एहतियातन कक्षाएं बंद कर दी हैं और अब बच्चे गैलरी में बैठकर पढ़ाई कर रहे हैं। हालांकि गैलरी की छतें भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं-कई जगहों पर दरारें साफ दिखाई देती हैं।
छात्रा सूरज ने बताया कि उनके स्कूल के कमरे जर्जर हैं, इसलिए सभी बच्चों को गैलरी में बैठाया जाता है। झालावाड़ की घटना के बाद उनके मन में डर और चिंता दोनों है, लेकिन पढ़ाई के प्रति उनका जुनून अब भी कायम है। एक अन्य छात्र ने बताया कि “स्कूल की छत टूटी हुई है, सभी कक्षाओं की यही हालत है। हमें डर तो लगता है, लेकिन मजबूरी में बाहर बैठकर पढ़ते हैं। हमारी मांग है कि सरकार स्कूल की जल्द मरम्मत करवाए।”
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शिक्षिका निशिका शर्मा ने बताया कि स्कूल बाहर से देखने में ठीक लगता है, लेकिन अंदर की स्थिति चिंताजनक है। छतें जर्जर हैं, बरसात के दिनों में रिसाव और सीमेंट का गिरना आम बात है। उन्होंने बताया कि स्कूल में 120 बच्चे पढ़ते हैं, जिनके लिए 2018 में बना एक हॉल और बरामदा ही फिलहाल पढ़ाई के लिए सुरक्षित स्थान हैं। सभी जर्जर कमरों को बंद कर दिया गया है ताकि कोई हादसा न हो।
उन्होंने बताया कि स्कूल की बदहाल स्थिति के बारे में कई बार शिक्षा विभाग के अधिकारियों को अवगत कराया गया है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। शिक्षकों को आशंका है कि अगर कोई हादसा हुआ तो सारी जिम्मेदारी उन्हीं पर डाली जाएगी। स्थानीय लोगों और स्कूल स्टाफ की मांग है कि शासन-प्रशासन जल्द से जल्द स्कूल भवन की मरम्मत कर बच्चों को सुरक्षित माहौल में शिक्षा दिलाने की व्यवस्था करे।