बाड़मेर न्यायालय ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए शिव पंचायत समिति के प्रधान महेंद्र चौधरी को अयोग्य करार दिया और कैलाश सिंह राठौड़ को नया प्रधान घोषित किया। इस निर्णय ने जिले की राजनीतिक हलचल को तेज कर दिया है। न्यायालय ने पाया कि पंचायत राज चुनाव के दौरान महेंद्र चौधरी ने अपने नामांकन पत्र में दर्ज आपराधिक मामलों की जानकारी छिपाई थी।
नामांकन में तथ्यों की जानकारी छिपाने पर कार्रवाई
न्यायालय ने याचिकाकर्ता कैलाश सिंह राठौड़ की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि नामांकन पत्र में आपराधिक प्रकरणों की जानकारी न देना चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता के विपरीत है। फैसले के बाद अदालत ने कैलाश सिंह राठौड़ को नया प्रधान घोषित किया, जबकि महेंद्र चौधरी का कार्यकाल तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया गया। कोर्ट के निर्णय के बाद कैलाश सिंह राठौड़ के समर्थकों ने फूल-मालाओं और साफा पहनाकर उनका स्वागत किया और इस फैसले को सत्य की जीत बताया।
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2020 में एक वोट से हारे थे कैलाश सिंह
शिव पंचायत समिति में कुल 19 सदस्य हैं। दिसंबर 2020 में हुए पंचायत समिति के प्रधान चुनाव में कैलाश सिंह राठौड़ कांग्रेस उम्मीदवार थे, जबकि भाजपा ने निर्दलीय प्रत्याशी महेंद्र चौधरी का समर्थन किया था।
चुनाव में क्रॉस वोटिंग के कारण महेंद्र चौधरी को 10 और कैलाश सिंह को 9 वोट मिले, जिससे चौधरी प्रधान बने। इसके बाद कैलाश सिंह ने अदालत में याचिका दायर की, जिसमें आरोप लगाया कि चौधरी ने नामांकन पत्र में झूठी जानकारी दी और आपराधिक मामलों का उल्लेख नहीं किया। उन्होंने कहा कि हालांकि न्याय मिलने में समय लगा, लेकिन अंततः सत्य की जीत हुई।
फैसले को बताया ऐतिहासिक
याचिकाकर्ता के पक्ष की एडवोकेट मुस्कान सर्राफ ने इस निर्णय को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि अदालत ने पारदर्शिता और ईमानदारी के सिद्धांत को सर्वोपरि रखा है। उन्होंने कहा कि यह फैसला भविष्य में एक मिसाल बनेगा और कोई भी उम्मीदवार अब चुनाव में अपने नामांकन पत्र में तथ्य छिपाने की हिम्मत नहीं करेगा। सर्राफ ने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती का प्रतीक बताया और कहा कि अदालत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि चुनाव प्रक्रिया में धोखाधड़ी की कोई जगह नहीं है।
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