भीलवाड़ा जिले के आसींद उपखंड के बराणा गांव निवासी भदाला (जाट) परिवार ने रविवार को सामाजिक परंपराओं का निर्वहन करते हुए मायरा (भराभात) की ऐसी मिसाल पेश की, जिसने पूरे मेवाड़ क्षेत्र में चर्चा का विषय बना दिया। यह मायरा परड़ोदास गांव निवासी बहन कमला देवी (पत्नी मोहन मुंदा) के पुत्र एवं पुत्री के शुभ विवाह अवसर पर भरा गया। भाई-बहन के स्नेह और पारिवारिक दायित्व से ओतप्रोत इस आयोजन ने मेवाड़ की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।
सोना और नकद राशि का ऐतिहासिक योगदान
भाइयों हरदेव, छगन एवं सुखदेव भदाला परिवार की ओर से बहन के मायरे में 16.5 तोला सोना भेंट किया गया, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 26 लाख रुपये आंकी गई। इसके साथ ही 56 लाख 51 हजार 101 रुपये नकद राशि दी गई। चूड़ा के अवसर पर अलग से 21 हजार 101 रुपये प्रदान किए गए। इस प्रकार कुल मिलाकर 82 लाख 72 हजार 201 रुपये का मायरा भरा गया। ग्रामीणों और समाजबंधुओं के बीच इस मायरे की चर्चा दिनभर होती रही।
गौसेवा के लिए दान
भदाला परिवार ने सामाजिक सरोकारों का परिचय देते हुए बहन के मावण उपलक्ष्य में अगरपुरा में निर्माणाधीन नवीन गौ चिकित्सालय के लिए 2 लाख 1 हजार रुपये दान स्वरूप भेंट किए। यह राशि नारायण भदाला, संस्थापक नशा मुक्त एवं शहीद भगत सिंह गौ चिकित्सालय, को सौंपी गई। भाइयों ने विवाह जैसे शुभ अवसर पर गौसेवा और समाजोपयोगी कार्यों में सहयोग को पुण्य का कार्य बताया।
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सामाजिक समरसता का संदेश
परिवार ने गांव परड़ोदास में प्रत्येक घर को एक-एक स्टील का बर्तन उपहार स्वरूप प्रदान किया। इससे ग्रामीणों में खुशी का माहौल रहा और परिवार की उदारता की सराहना की गई। बराणा निवासी सम्पत जाट ने बताया कि सुखदेव जाट माइंस एवं थ्रेसर गिट्टी प्लांट का संचालन करते हैं। उनके दो पुत्र एवं एक पुत्री हैं, जबकि बहन कमला देवी के एक पुत्र और एक पुत्री हैं। आयोजन में देवकरण ज्यानी (पूर्व सरपंच), छोटू बडला, सम्पत भदाला, छगना उला, नारायण भदाला, शंकर खाखल, हरदेव डंडेल, मिश्री डंडेल सहित बड़ी संख्या में समाजबंधु और ग्रामीण उपस्थित रहे।
पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न कार्यक्रम
कार्यक्रम पारंपरिक रीति-रिवाजों, मंगल गीतों और विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ। मायरे के दौरान पूरे गांव में उत्सव जैसा वातावरण रहा। ढोल-नगाड़ों की गूंज और महिलाओं द्वारा गाए गए मंगल गीतों से माहौल आनंदमय बना रहा।