रामनवमी के अवसर पर बूंदी जिले में आयोजित कार्यक्रम में राजस्थान के शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने समाज में व्याप्त छुआछूत और जातिवाद पर जमकर प्रहार किया। डायट परिसर में स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा के अनावरण समारोह के दौरान उन्होंने कहा कि आज के समय में समाज को सबसे अधिक जरूरत आपसी भाईचारे और समानता की है।
दिलावर ने अपने संबोधन में भगवान राम के जीवन से उदाहरण देते हुए कहा कि राम ने कभी ऊंच-नीच का भेद नहीं किया। उन्होंने शबरी के जूठे बेर प्रेमपूर्वक स्वीकार किए और निषाद राज को गले लगाया। यह दर्शाता है कि भारतीय संस्कृति की मूल भावना समानता और अपनत्व की रही है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब भगवान राम के मन में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं था, तो फिर समाज में छुआछूत और भेदभाव की सोच कहां से आई। दिलावर ने कहा कि गुलामी के दौर में कुछ कुटिल शक्तियों ने समाज को बांटने का काम किया और लोगों के मन में ऊंच-नीच की भावना भर दी। लेकिन आज देश स्वतंत्र है और अब समय आ गया है कि हम उन पुरानी गलत धारणाओं को खत्म करें।
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मंत्री ने कहा कि तालाब का पानी अगर पशु पी सकते हैं, तो इंसान को उससे वंचित करना हमारी सोच की विकृति को दर्शाता है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे स्वयं छुआछूत में विश्वास नहीं रखते और समाज को भी इससे बाहर निकलना चाहिए।
दिलावर ने चेतावनी दी कि यदि जाति-पांति और छुआछूत जैसी कुरीतियों को खत्म नहीं किया गया तो समाज कमजोर होगा और टूटने का खतरा बढ़ेगा। उन्होंने सभी लोगों से आह्वान किया कि वे स्वामी विवेकानंद के विचारों और भगवान राम के आदर्शों को अपनाकर एक समरस और मजबूत समाज का निर्माण करें।