जयपुर में साइबर क्राइम पुलिस ने एक बड़े अंतरराज्यीय ठगी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए 17 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने एक कंपनी के चेयरमैन की फोटो और नाम का इस्तेमाल कर व्हाट्सएप पर अकाउंटेंट को झांसे में लिया और 5 करोड़ 30 लाख रुपये अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करवा लिए।
मामले की शिकायत 24 अप्रैल 2026 को साइबर हेल्पलाइन 1930 पर दर्ज हुई। परिवादी दीपेन्द्र सिंह, जो एक माइनिंग कंपनी में अकाउंटेंट है, को व्हाट्सएप पर चेयरमैन के नाम से मैसेज मिला। संदेश में तत्काल भुगतान के निर्देश दिए गए। भरोसा कर उसने बड़ी रकम ट्रांसफर कर दी, बाद में ठगी का खुलासा हुआ।
जांच में सामने आया कि ठगी की रकम को कई बैंक खातों में ट्रांसफर कर परत-दर-परत घुमाया गया। इसके बाद नकद निकासी कर यूएसडीटी (क्रिप्टोकरेंसी) और हवाला के माध्यम से रकम को छिपाया गया। साइबर क्राइम पुलिस ने तकनीकी विश्लेषण और बैंक खातों की जांच के आधार पर पूरे नेटवर्क को ट्रैक किया।
कार्रवाई के दौरान कोटा ग्रामीण, पाली, बांसवाड़ा, जोधपुर और बाड़मेर पुलिस के सहयोग से 17 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इनमें बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले, नकद निकालने वाले, कमीशन एजेंट और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए ट्रांजेक्शन करने वाले शामिल हैं।
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जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी चाय की दुकानों और थड़ियों पर मिलकर कमीशन का बंटवारा करते थे ताकि किसी को शक न हो। गिरोह में वकालत का छात्र, सैलून कर्मचारी, ऑटो पार्ट्स दुकानदार और ई-मित्र संचालक तक शामिल थे। ये लोग अपने या दूसरों के नाम पर बैंक खाते खुलवाकर ठगों को देते थे और 3 हजार से 50 हजार रुपये तक कमीशन लेते थे।
कोटा में ठगी की रकम को नकद निकालकर क्रिप्टो में बदलने का काम होता था, जबकि बांसवाड़ा और पाली में नए खाते उपलब्ध कराने की भूमिका सामने आई। जोधपुर में यूएसडीटी खरीद-बिक्री के जरिए रकम छिपाई जाती थी।
साइबर क्राइम पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी वित्तीय लेन-देन से पहले व्हाट्सएप मैसेज या कॉल की पुष्टि जरूर करें। ठगी होने पर तुरंत हेल्पलाइन 1930 या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।