राजस्थान की अरावली पर्वत श्रृंखला को लेकर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। भाजपा और कांग्रेस के बीच खनन नीति, अरावली की परिभाषा और पर्यावरण संरक्षण को लेकर तीखा राजनीतिक टकराव देखने को मिल रहा है। भाजपा जहां इसे भ्रम फैलाने की कांग्रेस की राजनीति बता रही है, वहीं कांग्रेस इसे अरावली को बर्बाद करने की गहरी साजिश करार दे रही है।
भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में प्रदेश के पूर्व प्रवक्ता रामलाल शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में अरावली के “एक भी पत्थर का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा।” उन्होंने स्पष्ट किया कि भाजपा सरकार की मंशा अरावली संरक्षित क्षेत्र को स्पष्ट रूप से परिभाषित करने और अवैध खनन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की है। जब तक नई परिभाषा के आधार पर कोई योजना नहीं बन जाती, तब तक किसी भी प्रकार का नया खनन पट्टा जारी नहीं किया जाएगा।
रामलाल शर्मा ने कांग्रेस पर तुष्टीकरण और भ्रम फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि पहले सीएए, फिर एसआईआर और अब अरावली को लेकर जनता को गुमराह किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2002 में कांग्रेस सरकार के दौरान अरावली की जो परिभाषा तय की गई थी, उसी समय सबसे अधिक खनन पट्टे जारी हुए थे और 100 मीटर का नियम बनाया गया था। इसके विपरीत 2025 की नई व्यवस्था में अरावली के 500 मीटर के दायरे में आने वाला क्षेत्र चाहे वह 100 मीटर से छोटा ही क्यों न हो, आरक्षित माना जाएगा, जिससे खनन में स्पष्ट कमी आएगी।
भाजपा प्रवक्ता ने सरकार की कार्रवाई के आंकड़े भी गिनाए। उन्होंने बताया कि पिछले दो वर्षों में अवैध खनन के खिलाफ 20,526 प्रकरण दर्ज किए गए, 211.26 करोड़ रुपये का जुर्माना वसूला गया, 2,228 एफआईआर दर्ज हुईं और 1,175 लोगों को गिरफ्तार किया गया। अरावली क्षेत्र में ही 10,966 प्रकरण दर्ज कर 136.78 करोड़ रुपये वसूले गए हैं।
वहीं, विधायक कैलाश वर्मा ने कहा कि कांग्रेस के नेताओं को अरावली हिल्स की परिभाषा तक नहीं पता। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री और वन एवं पर्यावरण मंत्री पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि अरावली पूरी तरह सुरक्षित है। इसके बावजूद कांग्रेस झूठ और भ्रम फैलाकर राजनीति कर रही है।
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दूसरी ओर, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने केंद्र सरकार और भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के “केवल 0.19% नए खनन” के दावे को आंकड़ों की बाजीगरी बताया। गहलोत के अनुसार 1.44 लाख वर्ग किलोमीटर के अरावली क्षेत्र का 0.19% भी लगभग 273.6 वर्ग किलोमीटर यानी करीब 68,000 एकड़ जमीन होता है, जहां 27,200 तक नई वैध खदानें खुल सकती हैं।
गहलोत ने आरोप लगाया कि MMDR एक्ट में 2021 और 2023 में किए गए संशोधनों से राज्यों के अधिकार कमजोर किए गए हैं और निजी व विदेशी कंपनियों को खनन की खुली छूट दी गई है। उन्होंने चेतावनी दी कि वैध खनन की आड़ में अवैध खनन को रोकना किसी सरकार के बस की बात नहीं होगी और इसका दुष्प्रभाव खेती, जलस्तर और पर्यावरण पर पड़ेगा।
कुल मिलाकर, अरावली को लेकर भाजपा और कांग्रेस के दावे पूरी तरह विपरीत हैं। भाजपा इसे संरक्षण और सख्ती की नीति बता रही है, जबकि कांग्रेस इसे पर्यावरण और संघीय ढांचे पर बड़ा खतरा मान रही है। अब इस मुद्दे पर अंतिम भरोसा जनता और न्यायिक प्रक्रिया के निर्णय पर टिका हुआ है।