झालावाड़ जिले के मनोहरथाना ब्लॉक के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय झीकनी में लगातार हो रही बारिश के चलते नाले का पानी विद्यालय परिसर में घुस गया। नाले में तेज बहाव बढ़ता देख स्कूल में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। इस दौरान ग्रामीणों ने स्टाफ के सहयोग से बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला। जबकि मनोहरथाना इलाके में पूर्व में पीपलोदी सरकारी स्कूल की छत गिरने से सात स्टूडेंट्स की मौत हो चुकी है और दो दर्जन स्टूडेंट्स घायल हुए थे। इसके बावजूद बारिश के दिनों में अनदेखी भारी पड़ सकती है।
सुबह से शुरू हुई तेज बारिश
जिले में बीती रात से ही यूं तो हल्की बारिश का दौर जारी है, लेकिन आज सुबह जैसे ही तेज बारिश हुई, जिले भर के कई इलाकों में पानी ही पानी हो गया। ऐसे में कई स्कूलों में पानी घुसने से हालात बिगड़ गए। मतलब बच्चों का जीवन संकट में आ गया। ऐसा ही एक मामला मनोहरथाना उपखंड क्षेत्र के सरकारी स्कूल में देखने को मिला। यहां स्कूल में पानी घुसने के बाद करीब 80 बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। जबकि इसी क्षेत्र में पीपलोदी स्कूल हादसे के चलते सात बच्चे स्कूल की छत गिरने से अकाल मौत का शिकार हुए थे। लेकिन, बावजूद इसके बच्चों को स्कूल से समय पर नहीं छोड़ने से हालात बिगड़ते नजर आए।
स्कूल के अंदर मौजूद 80 बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला
ग्रामीणों के अनुसार, स्कूल के सात अध्यापकों और करीब एक दर्जन ग्रामीणों ने साहस दिखाया और विद्यालय में मौजूद करीब 80 बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला। अध्यापकों और ग्रामीणों की मदद से सभी बच्चों को सुरक्षित उनके घर पहुंचाया गया। वहीं, नाले के तेज बहाव की चपेट में आने से विद्यालय की करीब 50 फीट लंबी बाउंड्री क्षतिग्रस्त हो गई। गनीमत रही कि समय रहते बच्चों को स्कूल से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। इससे एक बड़ा हादसा टल गया। घटना के बाद विद्यालय और आसपास के क्षेत्र में बारिश के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
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दीवार टूटने पर स्कूल में घुसा पानी
संस्था प्रधान बबलू ने बताया कि पास में स्थित नाले का पानी अचानक आने से यह हालात बने। पिछले छह साल में कभी भी इस नाले का पानी स्कूल तक नहीं आया। स्कूल भवन का निरीक्षण हो चुका है और बिल्डिंग पूरी तरह मजबूत है। कक्षा 1 से 8वीं तक के इस स्कूल में 103 बच्चों का नामांकन है। ब्लॉक शिक्षा अधिकारी राजेंद्र मेहरा ने बताया कि स्कूल के पीछे पहाड़ी पर पानी को रोकने के लिए ग्रामीणों ने ही एक दीवार बना रखी है। उसके टूटने से ही स्कूल के अंदर पानी आया था, लेकिन समय रहते बच्चों को निकाल लिया गया और कुछ देर बाद पानी भी कम हो गया था।
एक साल पहले हो चुका है पीपलोदी हादसा
बता दें कि झालावाड़ जिले के मनोहरथाना इलाके में पीपलोदी के सरकारी स्कूल की छत बारिश के दौरान गिरने से करीब एक साल पहले सात बच्चों की नीचे दबने से मौत हो गई थी। ऐसे में बारिश के दौरान हुए इस हादसे से अन्य स्कूल भी कोई सबक नहीं ले रहे हैं।
झालावाड़ जिले में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश से कई इलाकों में हालात बिगड़ गए हैं। बकानी सहित कई कस्बों और गांवों में जलभराव से जनजीवन प्रभावित हुआ है। जेल रोड समेत निचले इलाकों में पानी भरने से लोगों को आवागमन में परेशानी हुई। कालीसिंध बांध का जलस्तर बढ़ने पर 12 गेट खोलकर 1,90,663 क्यूसेक पानी की निकासी की जा रही है। बकानी में मुख्य बाजार और तहसील कार्यालय जलमग्न हो गए। नेवखेड़ी में पानी के तेज बहाव में कई मवेशी बह गए, जिनमें एक भैंस की मौत हो गई। प्रशासन ने लोगों से जलभराव और तेज बहाव वाले क्षेत्रों से दूर रहने की अपील की है।