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Ten people convicted of killing policeman sentenced to life imprisonment, including father and his three sons
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Kota: चुनावी रंजिश में हुई थी पुलिसकर्मी की हत्या: कोर्ट ने पिता-पुत्र समेत 10 दोषियों को सुनाई उम्रकैद की सजा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोटा Published by: कोटा ब्यूरो Updated Thu, 12 Mar 2026 06:28 PM IST
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राजस्थान के कोटा जिले में साल 2019 में चुनावी रंजिश के चलते हुए पुलिसकर्मी हत्याकांड के मामले में एससी-एसटी कोर्ट ने गुरुवार को बड़ा फैसला सुनाया है। न्यायालय ने इस मामले में 10 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। दोषियों में एक पिता और उसके तीन बेटे भी शामिल हैं। विशिष्ट लोक अभियोजक रितेश मेवाड़ा ने बताया कि इस मामले में परिवादी पंकज बागड़ी ने 4 फरवरी 2019 को कैथून थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। रिपोर्ट में बताया गया था कि गलाना गांव में बालापुरा लिफ्ट सिंचाई परियोजना के चुनाव हो रहे थे। 3 फरवरी 2019 को मेघराज अध्यक्ष चुना गया था और इसके बाद विजयी जुलूस निकाला गया।
जुलूस के दौरान हुआ था विवाद
विजयी जुलूस के दौरान परिवादी के चाचा अभिमन्यु, जो पुलिसकर्मी थे, को मेघराज ने टक्कर मार दी थी। इस बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच कहासुनी और झगड़ा हो गया था। हालांकि समझाइश के बाद मामला शांत हो गया था।
रात में घर पर किया हमला
इसके बाद भी उसी रात मेघराज और उसके साथियों ने अभिमन्यु के घर पर हमला कर दिया। आरोपियों ने गाली-गलौच करते हुए जातिसूचक शब्दों से अपमानित किया। इसी दौरान मेघराज के बेटे तीर्थराज ने अभिमन्यु पर गोली चला दी, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
पुलिस ने 10 आरोपियों को किया था गिरफ्तार
घटना के बाद कैथून थाना पुलिस ने हत्या और एससी-एसटी एक्ट सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस ने मेघराज नागर, कुशराज, रामराज, दिनेश, भगवान, नवीन कुमार, ओमप्रकाश, हेमराज, तीर्थराज और शैलेंद्र को गिरफ्तार किया था। इनमें मेघराज और उसके तीन बेटे कुशराज, रामराज और तीर्थराज भी शामिल थे।
135 पेज का फैसला
मामले की सुनवाई के बाद एससी-एसटी कोर्ट के न्यायाधीश मनोज कुमार गोयल ने गुरुवार को फैसला सुनाते हुए सभी 10 आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अभियोजक रितेश मेवाड़ा के अनुसार इस मामले में कोर्ट का फैसला 135 पेज का है और इसकी 12 प्रतियां तैयार की गई हैं।
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