डेगाना के तिलानेस गांव में शुक्रवार को आयोजित मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की चौपाल के दौरान विकास कार्यों के साथ स्थानीय भाजपा की अंदरूनी खींचतान भी खुलकर सामने आती नजर आई। एक ओर मुख्यमंत्री किसानों को आधुनिक खेती और नवाचार अपनाने की सलाह दे रहे थे, वहीं दूसरी ओर ग्रामीणों ने स्थानीय विधायक अजय सिंह किलक के सामने बिजली और विकास कार्यों को लेकर नाराजगी जाहिर की। वहीं कार्यक्रम में भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. ज्योति मिर्धा, पूर्व विधायक रिछपाल सिंह मिर्धा और उनके पुत्र विजयपाल मिर्धा की अनुपस्थिति भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी रही।
मुख्यमंत्री शुक्रवार सुबह तिलानेस गांव पहुंचे और किसानों के खेतों में मूंग की फसल का जायजा लिया। उन्होंने किसानों से कहा कि सरकारी सहायता का उपयोग खेती में नवाचार और आधुनिक तकनीक अपनाने के लिए करें, ताकि उत्पादन और आय दोनों बढ़ सकें। इस दौरान उन्होंने खेत में उतरकर निंदाई का अनुभव भी साझा किया। इसके बाद एक पेड़ मां के नाम अभियान के तहत पौधरोपण किया।
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चौपाल के दौरान ग्रामीण रामलाल ने गांव की विभिन्न समस्याएं मुख्यमंत्री के सामने रखीं। इस पर मुख्यमंत्री ने मुस्कुराते हुए कहा- "हर गांव में ऐसे रामलाल मिलते हैं, लेकिन वास्तविक जरूरतों की बात करो।" इसके बाद ग्रामीणों ने टांकों के निर्माण, ढाणियों तक पेयजल, खेतों तक सड़क, स्कूल के क्रमोन्नयन, रामसरी-तिलानेस सड़क निर्माण और तालाब विस्तार जैसी मांगें रखीं, जिसके लिए मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। कार्यक्रम के दौरान माहौल उस समय गर्म हो गया जब एक ग्रामीण ने मुख्यमंत्री से कहा- "बिजली तो है, मगर उसमें करंट नहीं।" वहीं एक अन्य ग्रामीण ने स्थानीय विधायक अजय सिंह किलक की ओर इशारा करते हुए कहा, "आपसे कई बार बिजली कनेक्शन के लिए कहा, लेकिन आज तक काम नहीं हुआ।"
सूत्रों के अनुसार यह कार्यक्रम दो दिन पहले प्रस्तावित था लेकिन बाद में स्थगित कर दिया गया था। इसके बाद मुख्यमंत्री शुक्रवार को गांव पहुंचे। कार्यक्रम में मिर्धा परिवार की गैरमौजूदगी को लेकर भी भाजपा की स्थानीय राजनीति में चर्चाओं का दौर रहा। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार गांवों के समग्र विकास और किसानों की आय बढ़ाने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि सिंचाई, सड़क, शिक्षा और कृषि क्षेत्र में कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। साथ ही ग्रामीणों से सरकारी योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाने और विकास कार्यों में सहभागी बनने की अपील की।
मुख्यमंत्री की यह चौपाल जहां ग्रामीण समस्याओं और विकास कार्यों को लेकर चर्चा में रही, वहीं स्थानीय भाजपा की अंदरूनी सियासत और ग्रामीणों की खुली नाराजगी ने भी राजनीतिक हलकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।