ये कहावत है ना कि भक्ति में ही शक्ति है, वो समीपवर्ती गुजरात के विश्व प्रसिद्ध शक्तिपीठ अंबाजीधाम में सही साबित हो रही है। इस मंदिर में देश विदेश से हर साल लाखों की तादात में श्रद्धालु मां अंबे के दरबार में अपनी मनोकामनाएं लेकर आते हैं। फिर जब उनकी ये मनोकामनाएं पूरी हो जाती है तो अपने सामर्थ्य के अनुसार भेंट चढ़ाकर मां का आभार जताते है। ऐसा ही एक नजारा मंगलवार को देखने के लिए मिला। जब सौराष्ट्र के ऐसे ही एक भक्त ने 33 लाख रुपए कीमत के सोने के हार का गुप्त दान कर मां अंबे का आभार जताया है। इससे पहले पिछले शुक्रवार को ही जय भोले ग्रुप की ओर से 43.51 लाख रुपए कीमत के सोने एवं हीरे का मुकुट भेट किया गया था।
51 शक्तिपीठों में से एक है अंबाजीधाम
राजस्थान-गुजरात सीमा पर स्थित अंबाजीधाम 51 शक्तिपीठों में से एक है। यहां पर सोने के दान की परंपरा नई नहीं है। जब भी किसी भक्त की कोई मनोकामना पूरी होती है तो वह मां अंबे के प्रति कृतज्ञता दर्शाने के लिए अपने सामर्थ्य के अनुसार दान करता है। यहां पर चढ़ावे में लगातार आ रहे सोने की बदौलत ही इस मंदिर का गुंबद भी सोने से बनाया जा रहा है। यह काम वर्षों से लगातार चल रहा है।
भक्त ने किया गुप्त दान
मंगलवार को सौराष्ट्र के एक भक्त की ओर से बेहद आकर्षक बनाया गया सोने के हार का गुप्त दान किया गया है। इसकी कीमत करीब 33.13 लाख रुपए बताई गई है। इससे पूर्व गत शुक्रवार को जय भोले ग्रुप की ओर से 620 ग्राम सोने ओर हीरे का मुकुट भेंट किया गया था। इसकी कीमत 43.51 लाख रुपए बताई गई थी।
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रेल एवं सड़क मार्ग से पहुंचा जा सकता है अंबाजीधाम
गुजरात का यह शक्तिपीठ अंबाजीधाम सिरोही जिले के आबूरोड शहर से महज 17 किलोमीटर दूरी पर स्थित है। आबूरोड रेलवे स्टेशन देश के तकरीबन सभी क्षेत्रों से जुड़ा है। ऐसे में श्रद्धालु यहां तक रेलों से आसानी से आवाजाही कर सकते हैं। इसके बाद आगे का सफर सड़क मार्ग से पूरा करना होगा। रेलवे स्टेशन से बाहर निकलते ही प्राईवेट और शेयरिंग टैक्सियां मिल जाती है। इसके साथ ही महज 500 मीटर की दूरी पर रोडवेज बस स्टेशन है। जहां से राजस्थान एवं गुजरात रोडवेज की बसों से अंबाजी जाया जा सकता है।