{"_id":"695cd439a61456a3fc00639a","slug":"video-vatara-lsata-ka-jaga-ma-2027-ka-patakatha-brabka-bna-sayasa-parayagashal-2026-01-06","type":"video","status":"publish","title_hn":"वोटर लिस्ट की जंग में 2027 की पटकथा, बाराबंकी बना सियासी प्रयोगशाला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
वोटर लिस्ट की जंग में 2027 की पटकथा, बाराबंकी बना सियासी प्रयोगशाला
बाराबंकी में निर्वाचन आयोग द्वारा चलाए जा रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान ने अब सियासी तापमान बढ़ा दिया है। अभियान अपने अंतिम चरण में है, लेकिन इसी बीच कांग्रेस, भाजपा और समाजवादी पार्टी के बड़े नेताओं के बयान इस प्रक्रिया को लेकर आमने-सामने आ गए हैं।
बाराबंकी से जुड़े इस पूरे घटनाक्रम के राजनीतिक मायने इसलिए भी अहम माने जा रहे हैं, क्योंकि यह जिला लखनऊ से सटा होने के साथ-साथ पूर्वांचल की राजनीति में खास वजन रखता है। मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण को लेकर कांग्रेस सांसद तनुज पुनिया ने सीधे निर्वाचन आयोग पर सवाल खड़े करते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उनकी याचिका पर अदालत के निर्देश के बाद चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया गया है। इस पूरे मामले ने न सिर्फ बाराबंकी बल्कि प्रदेश की राजनीति में भी नई बहस छेड़ दी है।
कांग्रेस सांसद तनुज पुनिया का कहना है कि 2003 में जब गहन मतदाता पुनरीक्षण हुआ था, तब उसमें छह महीने का समय लगा था। इस बार उत्तर प्रदेश के करीब 15 करोड़ 42 लाख मतदाताओं की समीक्षा के लिए महज एक महीने का वक्त दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि कई जगह मतदाता सूची के कई-कई पन्ने गायब हैं। इस संबंध में उन्होंने चुनाव आयोग से शिकायत की, लेकिन संतोषजनक कार्रवाई न होने पर सुप्रीम कोर्ट में रिट दाखिल करनी पड़ी। हालांकि पुनिया ने यह भी स्वीकार किया कि कुछ इलाकों में काम बेहतर हुआ है, लेकिन उन्होंने आयोग पर भाजपा के दबाव में काम करने का गंभीर आरोप लगाया।
कांग्रेस के आरोपों पर भाजपा की ओर से तीखा जवाब आया। दरियाबाद विधायक और प्रदेश सरकार में खाद्य एवं रसद तथा नागरिक आपूर्ति राज्यमंत्री सतीश चंद्र शर्मा ने कहा कि अब तक जितने भी एसआईआर अभियान हुए हैं, वे सभी कांग्रेस के शासनकाल में ही हुए। आज जब भाजपा सरकार मतदाता सूची का शुद्धिकरण कर रही है, तो कांग्रेस और समाजवादी पार्टी जनता को भ्रमित करने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने इसे स्वस्थ लोकतंत्र के लिए जरूरी प्रक्रिया बताया और कहा कि शुद्ध मतदाता सूची से ही निष्पक्ष चुनाव संभव हैं।
एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें
अमर उजाला प्रीमियम वीडियो सिर्फ सब्सक्राइबर्स के लिए उपलब्ध है
प्रीमियम वीडियो
सभी विशेष आलेख
फ्री इ-पेपर
सब्सक्राइब करें
Next Article
$video_url='';
Disclaimer
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।