मेवाड़ में महाराणा प्रताप जयंती महोत्सव को लेकर तैयारियां चल रही हैं। सात दिनों तक विविध कार्यक्रम आयोजित होंगे। इस बीच संयोजक प्रेम सिंह शक्तावत ने बताया कि संगठन का सपना साकार हो रहा है कि महाराणा प्रताप की तस्वीर हर घर तक पहुंचे, जिससे नई पीढ़ी में संस्कार, व्यक्तित्व निर्माण और राष्ट्रभक्ति की भावना विकसित हो।
शक्तावत ने सरकार से मांग करते हुए कहा कि राष्ट्रीय स्मारकों के निर्माण के साथ उनके रखरखाव की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए तथा शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी प्रतिष्ठानों में महाराणा प्रताप की प्रतिमा या तस्वीर अनिवार्य रूप से स्थापित की जाए।
मेवाड़ क्षत्रिय महासभा के केंद्रीय अध्यक्ष बालू सिंह कानावत ने कहा कि पिछले 40 वर्षों से चल रही इस सामाजिक और सांस्कृतिक तपस्या को समाज के सभी वर्गों, विभिन्न सामाजिक संगठनों, राजनीतिक दलों और नगर निगम का निरंतर सहयोग प्राप्त हो रहा है। यह महोत्सव समाज को एक सूत्र में पिरोने का प्रयास है।
महासभा अध्यक्ष डॉ. पृथ्वीराज सिंह चौहान ने कहा कि आयोजन का उद्देश्य केवल कार्यक्रम करना नहीं, बल्कि भारतीय परंपराओं, संस्कारों और राष्ट्रीय चेतना को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है।
सात दिवसीय कार्यक्रम के संयोजक कमलेंद्र सिंह पंवार ने बताया कि 10 जून से कार्यक्रमों का शुभारंभ होगा। हल्दीघाटी से पूजित माटी लाकर सभी आयोजनों में तिलक किया जाएगा। गोगुंदा स्थित राजतिलक स्थल पर पूजा-अर्चना और महाराणा प्रताप की महाआरती के साथ कार्यक्रमों की शुरुआत होगी। आयोजन में लगभग 45 समाजों और संगठनों की सक्रिय भागीदारी रहेगी।
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राजसमंद जिला अध्यक्ष लक्ष्मण सिंह झाला ने बताया कि 17 जून को की महाराणा प्रताप जयंती शोभायात्रा ऐतिहासिक और भव्य होगी। शोभायात्रा में महाराणा प्रताप की हरावल सेना के दस्ते झांकियों के रूप में शामिल होंगे, वहीं वनवासी बंधु अपनी पारंपरिक वेशभूषा में आकर्षण का केंद्र रहेंगे।
आयोजकों ने बताया कि कार्यकर्ता घर-घर जाकर पीले चावल देकर लोगों को शोभायात्रा और कार्यक्रमों में शामिल होने का निमंत्रण देंगे। सात दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव में सर्व समाज की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी।