Hindi News
›
Video
›
Rajasthan
›
Udaipur News: Youth jump around blazing Holi fire, cut pole with swords and perform traditional Gair dance
{"_id":"69a817356aa2b1a8bd0260b3","slug":"young-men-jumped-into-fire-performed-non-violent-dances-with-swords-the-unique-tradition-of-cutting-the-stick-mistakes-are-punished-udaipur-news-c-1-1-noi1460-4015569-2026-03-04","type":"video","status":"publish","title_hn":"Udaipur News: जलती होली के बीच कूदे युवक, डांडे को काटने की अनोखी परंपरा, तलवारों से खेला गैर नृत्य","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Udaipur News: जलती होली के बीच कूदे युवक, डांडे को काटने की अनोखी परंपरा, तलवारों से खेला गैर नृत्य
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उदयपुर Published by: उदयपुर ब्यूरो Updated Wed, 04 Mar 2026 10:34 PM IST
Link Copied
प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग परंपराओं के साथ होली मनाई जाती है लेकिन उदयपुर से सटे आदिवासी इलाकों में होली की एक अनोखी परंपरा देखने को मिलती है। यहां होली के मौके पर युवक जलती आग के बीच कूदते हैं, तलवारों के साथ गैर-नृत्य करते हैं और जलती होली में खड़े डांडे को तलवार से काटने की परंपरा निभाते हैं। इस परंपरा में गलती होने पर सजा का भी प्रावधान है।
उदयपुर के समीप बलीचा गांव में होलिका दहन पूर्णिमा के अगले दिन धुलंडी पर यह आयोजन किया जाता है। इस वर्ष ग्रहण के कारण बुधवार को यह कार्यक्रम हुआ। सुबह से ही आसपास के गांवों और सीमावर्ती गुजरात से आदिवासी समाज के लोग बड़ी संख्या में यहां एकत्र होने लगे।
युवाओं की टोली हाथों में तलवार और बंदूक लेकर गांव की गलियों से गुजरती हुई फाल्गुनी गीत गाते हुए पहाड़ियों से उतरकर लोकदेवी के स्थानक तक पहुंची। समाज के मुखिया, मोतबीर, महिलाएं, पुरुष और बच्चे बड़ी संख्या में मौजूद रहे। ढोल की थाप पर गैर-नृत्य हुआ लेकिन यहां डांडियों की जगह तलवारों के साथ गैर खेला जाता है। कुछ युवक एक हाथ में तलवार और दूसरे में बंदूक लेकर नृत्य करते नजर आए।
दोपहर करीब दो बजे शुरू हुए मुख्य आयोजन में जलती होली के बीच खड़े डांडे को तलवार से काटने की परंपरा निभाई गई। पूर्व उपसरपंच धूलेश्वर वसोहर के अनुसार हर युवक यह प्रयास नहीं कर सकता क्योंकि इसमें माइनस मार्किंग का भी प्रावधान है। जो युवक सफल होता है, उसे पुरस्कार दिया जाता है, जबकि गलती होने पर युवक को मंदिर में कुछ समय के लिए सलाखों के पीछे बंद किया जाता है। हालांकि सजा लंबी नहीं होती और जुर्माना व भविष्य में गलती न करने के वचन के बाद उसे छोड़ दिया जाता है।
वहीं खेरवाड़ा कस्बे के निचला खेरवाड़ा स्थित होली चौक में भी मंगलवार रात करीब 1:30 बजे होलिका दहन किया गया। इससे पहले आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचे। करीब एक दर्जन ढोलों की थाप पर गैर-नृत्य हुआ। शुभ मुहूर्त में होलिका दहन के बाद ग्रामीण युवक धधकते कंडों पर दौड़ पड़े। इस दौरान जलती होली के बीच खड़ी प्रह्लाद रूपी लकड़ी को निकालकर नदी में विसर्जित किया गया।
स्थानीय लोगों के अनुसार यह परंपरा वर्षों पुरानी है। मान्यता है कि जलती होली से प्रह्लाद रूपी लकड़ी को निकालकर नदी में विसर्जित करने से क्षेत्र में शांति और खुशहाली बनी रहती है। होली के इस आयोजन में आस्था के साथ युवाओं का साहस और परंपरा के प्रति समर्पण भी देखने को मिला, जिसने क्षेत्रवासियों और दर्शकों को रोमांचित कर दिया।
एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें
अमर उजाला प्रीमियम वीडियो सिर्फ सब्सक्राइबर्स के लिए उपलब्ध है
प्रीमियम वीडियो
सभी विशेष आलेख
फ्री इ-पेपर
सब्सक्राइब करें
Next Article
Disclaimer
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।