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थाईलैंड और कंबोडिया के श्रद्धालुओं ने अयोध्या में सुंदरकांड का किया रसपान
अयोध्या में बालू घाट पर चल रहे सप्तम अश्वमेघ महायज्ञ के चौथे दिन बुधवार को थाईलैंड और कंबोडिया से आए हुए भक्तों ने सुंदर कांड के कथा का रसपान किया। इस दौरान मातेश्वरी धाम के सद्गुरु महाराज ने सुंदर कांड के गूढ़ अर्थों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सुंदर कांड केवल रामकथा का एक अध्याय नहीं, बल्कि यह मित्रता, त्याग, सेवा और धर्म के प्रति अडिग निष्ठा का प्रतीक है।
उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं से संवाद करते हुए सुंदर कांड के आध्यात्मिक और सामाजिक संदेश को सरल शब्दों में प्रस्तुत किया। वहीं, यज्ञ में आहुतियों का क्रम भी चलता रहा। उन्होंने कहा कि सुंदर कांड की सुंदरता उसके शब्दों में नहीं, बल्कि उसके भावों में है। यह कांड सखा-भाव का महत्त्व समझाता है, जहां हनुमान जी प्रभु श्रीराम के सच्चे मित्र बनकर उनके कार्य को अपने जीवन का लक्ष्य बना लेते
हैं। सुंदर कांड हमें यह सिखाता है कि सच्ची मित्रता वही है जो संकट में साथ खड़ी हो और बिना किसी स्वार्थ के धर्म के मार्ग पर चल पड़े।
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