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VIDEO: 10 सूत्री मांगों को लेकर उ प्र ग्राम रोजगार सेवक संघ ने निकाली बाइक रैली
उ०प्र० में संविदा पर नियुक्त 36000 ग्राम रोजगार सेवक को नियमित कर राज्य कर्मचारी का दर्जा देने सहित 10 सूत्रीय मांगो के सम्बन्ध में। उपर्युक्त विषय के अन्तर्गत अवगत कराना है कि वर्ष 2006 से मनरेगा योजन अन्तर्गत ग्राम रोजगार सेवक (पूर्ववर्ती पंचायत मित्र) प्रदेश की ग्राम पंचायतों में विगत 17 वर्ष से संविदा पर कार्यरत हैं जिन्हें मनरेगा योजना की धनराशि के प्रशासनिक मद से मानदेर भुगतान की व्यवस्था है प्रदेश की प्रत्येक ग्राम पंचायत की भौगोलिक स्थिति अलग-अलग है जिस कारण किसी ग्राम पंचायत में कार्य का स्कोप अधिक है तो किसी में कम है तथ मनरेगा मांग परक योजना है इसी कारण प्रत्येक ग्राम रोजगार सेवक को प्रशासनिक मद क अनुमन्य धनराशि से प्रत्येक माह समय से भुगतान नहीं हो पाता, नियमित समय से मानदेय भुगतान हर कार्मिक का अधिकार है जिस हेतु पृथक से बजट की आवश्यकता है।
ग्राम रोजगार सेवक ग्राम पंचायत स्तर पर सरकार की सभी जनकल्याणकार योजनाओं का संचालन करने में अपना पूर्ण योगदान देते है, किन्तु जाब चार्ट में सिर्फ मनरेगा का कार्य होने के कारण हमारे योगदान की गिनती नहीं की जाती इसलिए जाब चार्ट मे मनरेगा के अतिरिक्त अन्य कार्यों को जोड़ा जाय मा० मुख्यमंत्री जी आपके द्वारा 04.10.2021 को की गयी नई घोषणा के अनुरूप होगा।
ग्राम रोजगार सेवक विगत 17 वर्षों से अपना योगदान ग्राम पंचायतों में देते आ रहे हैं, वर्तमान में प्रदेश में लगभग 58194 ग्राम पंचायते सृजित है इन पंचायतों में सीधी भर्ती से नियुक्त ग्राम पंचायत / ग्रा०वि० अधिकारियों की कुल संख्या लगभग 15000 है अर्थात एक
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सचिव के साथ औसतन 4 ग्राम पंचायतें है जिसके कारण ग्रा०पं० के विकास व ग्रामीणों की समस्याओं के निस्तारण में असुविधा होती है। यदि सरकार द्वारा एक सहायक सचिव / ग्राम विकास सहायक का पद सृजित करके संविदा पर नियुक्त ग्राम रोजगार सेवकों को समायोजित कर दिया जाये तो प्रत्येक ग्राम पंचायत में सचिव की उपलब्धता भी हो जायेगी साथ ही साथ ग्राम रोजगार सेवक की लम्बे समय से की जा रही नियमितीकरण की मांग भी पूरी हो जायेगी।
उ०प्र० में ग्राम रोजगार सेवको का मासिक मानदेय 10,000/- रू० प्रतिमाह ई०पी०एफ० नियोक्ता अंश सहित निर्धारित है जबकि भारत के कई राज्यों में श्समूह गश् के कर्मचारियों के समान वेतन भुगतान व ग्रेड पे की व्यवस्था है इसलिए उ०प्र० में भी ग्राम रोजगार सेवको के लिए श्समूह गश् के राज्य कर्मचारियों की भाँति समान वेतन, भत्ते, बोनस इत्यादि दिया जाना चाहिए अथवा श्रम विभाग द्वारा जारी कुशल कामगारों के लिए जारी शासनादेश के अनुरूप 24000रू0 प्रतिमाह मानदेय की व्यवस्था की जाये।
प्राइवेट सेक्टर में कार्यरत कर्मचारियों को ई०पी०एफ०, बोनस, हेल्थ इंश्योरेंश आदि की सुविधा प्रदान की जाती है जबकि सरकारी विभाग में लम्बे समय से संविदा पर कार्यरत मनरेगा कर्मचारियों को इन सुविधाओं से वंचित रखा गया है। हमारे मानदेय में से वर्षों से कटौती की जाने वाली ई०पी०एफ० की धनराशि यू०ए०एन० में जमा नहीं की गयी है इसलिए ई०पी०एफ० सुविधा का लाभ मनरेगा कर्मियों को नही मिल पा रहा है। चिकित्सा लाभ प्राप्त करने के लिए किसी भी प्रकार के हेल्थ कार्ड की व्यवस्था नहीं है जो अन्यायपूर्ण है।
अतः उपरोक्त विषम परिस्थितियों के दृष्टिगत ग्राम रोजगार सेवको की निम्नलिखित मांगों / समस्याओं का समाधान किया जाना उचित होगा। ग्राम पंचायतों में सहायक सचिव / ग्राम विकास सहायक का पद सृजित कर ग्रा०रो० सेवकों को समायोजित करते हुए राज्य कर्मचारी
का दर्जा दिया जाये।
1. मा० मुख्यमंत्री जी द्वारा 4 अक्टूबर 2021 को लखनऊ के डिफेन्स एक्सपो मैदान में की गयी घोषणा के क्रम में रोजगार सेवकों के भविष्य को सुरक्षित करने हेतु मानव संसाधन नीति (ए०आर० पालिसी) का उचित निर्धारण कराया जाये। जिसमें न्यूनतम 24000 /- रूपये प्रतिमाह की व्यवस्था हो।
2. ग्राम पंचायत में मनरेगा के कार्यों में पारदर्शिता हेतु ग्राम रोजगार सेवक को पद से हटाने हेतु ग्राम पंचायत के सदस्यों के दो तिहाई बहुमत के स्थान पर ग्राम सभा के दो तिहाई बहुमत के आधार पर प्रस्ताव की व्यवस्था की जाये।
3. मासिक मानदेय भुगतान हेतु पृथक बजट की व्यवस्था का प्रावधान किया जाये अथवा मानदेय भुगतान सामग्री अंश से किया जाये।
4. यह कि प्रदेश के ग्राम रोजगार सेवकों का 12 से 14 महीने का मानदेय बकाया है जिससे आर्थिक तंगी के कारण आत्महत्या जैसे कदम उठाने को मजबूर हैं जिससे बच्चों की पढ़ाई, लिखाई, दवाई, माता पिता की सेवा नहीं हो पा रही है। मानदेय का भुगतान अविलम्ब कराया जाए।
5. ग्राम रोजगार सेवकों के जाब चार्ट में अन्य कार्य जोड़ते हुए विभागीय कर्मी घोषित किया जाये।
6. मनरेगा कार्यों की बेहतर मानीटरिंग के लिए उच्च गुणवत्ता वाले एड्रायड मोबाइल फोन उपलब्ध कराये जाये एवं डाटा रिचार्ज दिया जाये।
7. 4 अक्टूबर 2021 की घोषणा के क्रम में उ०प्र० राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की भाँति 20 दिन का आकस्मिक अवकाश एवं चिकित्सा अवकाश 12 दिनों की व्यवस्था का आदेश जारी किया जाये ।
8. ग्राम रोजगार सेवकों का न्याय पंचायत पर स्थानान्तरण की व्यवस्था को लागू किया जाये।
9. ग्राम रोजगार सेवकों के परिवार के मृतक आश्रित को सेवा प्रदान की जाये।
10. 01 जुलाई 2026 को वी०वी०जी राम जी योजना लागू होने में ग्राम रोजगार सेवकों को भूमिका और प्रभावी की जाये।
उपरोक्त मांगों / समस्याओं का निदान अतिशीघ्र न होने पर आगामी दिनाँक 01 जुलाई 2026 को विधानसभा का घेराव व लखनऊ के अन्य जगहों (जवाहर भवन, भाजपा कार्यालय, इन्दिरा भवन गेट, चारबाग रेलवे स्टेशन, राजभवन गेट इत्यादि) पर प्रदर्शन किया जायेगा। जिसकी जिम्मेदारी शासन प्रशासन की होगी।
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