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Kashipur: कॉलेज में लगे पेड़ों के बीजों से तैयार कर डाली नर्सरी
ग्लोबल वार्मिंग को कम करने एवं पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए राधेहरि पीजी कॉलेज के प्राध्यापक नर्सरी औषधीय समेत विभिन्न प्रकार की पौध तैयार करने में जुटे हैं। भविष्य में आवश्यकता पड़ने पर स्कूलों को भी निशुल्क पौधे वितरित करने की योजना बना रहे हैं। राधेहरि पीजी कॉलेज में शिक्षा और हिंद विभाग के प्राध्यापकों ने खाली जगह को सदुपयोग करके हरा भरा बना दिया है। वह कक्षाएं लेने के बाद समय मिलने पर नर्सरी में काम करते हैं। इसमें अर्जुन, बरगद, नीम, जामुन, गुलमोहर आदि औषधीय पौधे तैयार किए जा रहे हैं। शिक्षा शास्त्र के प्राध्यापक डॉ. कुंवरपाल सिंह ने बताया कि वह 2022 में हल्द्वानी से स्थानांतरित होकर आए हैं। वहां पर नीम की नर्सरी तैयार की थी। बताया कि निरंतर पर्यावरण में बदलाव देखने को मिल रहा है। कहा कि जैसे शिशु बचपन में नष्ट होता तो उसकी माता को बहुत दर्द होता है। ऐसे ही पेड़ों से गिरे बीज को उचित स्थान नहीं मिलने के कारण पेड़ों की छोटी-छोटी संताने नष्ट होने पर आत्मा दुखती थी। इसको देखकर मन में एक विचार आया था। वह पॉलीथिन में मिट्टी भरकर पौधे तैयार कर रहे हैं। आवश्यकता पड़ने लोगों को निशुल्क भी दे रहे हैं। वर्ष 2004 तक इसी कॉलेज के छात्र रहे हैं। हिंदी विभाग के प्राध्यापक डॉ. संतोष पंत ने बताया कि एनसीसी, एनएसएस के कैडेटों को साथ लेकर छात्रों को जागरूक भी कर रहे हैं। समय मिलने पर नर्सरी में नराई, गुड़ाई, पानी लगाना आदि संरक्षण स्वयं ही करते हैं। हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. सुभाष चंद्र कुशवाहा ने बताया कि हरेला पर्व पर नर्सरी में तैयार करीब ढाई सौ पौधे परिसर में लगाए गए हैं। ताकि कॉलेज का पर्यावरण सुरक्षित एवं संरक्षित रखा जा सके। छात्रों और लोगों को जागरूक किया जा रहा है। टीम में डॉ. ममतेश, प्रशांत, डॉ. शक्ति सिंह राणा मौजूद रहे।
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