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Trump Prepares Invasion Plans: Will Trump capture Greenland and Iran?
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Trump Prepares Invasion Plans: ग्रीनलैंड और ईरान पर कब्जा करेंगे ट्रंप?
अमर उजाला डिजिटल डॉट कॉम Published by: आदर्श Updated Tue, 13 Jan 2026 03:36 AM IST
क्या अमेरिका अब खुले तौर पर दुनिया की सीमाओं को चुनौती देने लगा है? वेनेजुएला में राष्ट्रपति की गिरफ्तारी के बाद क्या डोनाल्ड ट्रंप ने सैन्य ताकत को ही अपनी नई कूटनीति बना लिया है? ग्रीनलैंड पर अमेरिकी सेना की संभावित चढ़ाई क्या नाटो को तोड़ने की कगार पर ला देगी? ईरान को लेकर तैयार किए जा रहे सैन्य विकल्प… क्या यह पश्चिम एशिया में एक और युद्ध की आहट है? और जब ट्रंप कहते हैं कि “ईरान आज़ादी के करीब है”, तो क्या इसके पीछे लोकतंत्र है या तेल, ताकत और वर्चस्व की राजनीति? आज के इस वीडियो पैकेज में हम इन्हीं सवालों के जवाब ढूंढेंगे…कि ट्रंप का अगला कदम क्या होगा, दुनिया कितनी सुरक्षित है, और क्या हम एक नए वैश्विक टकराव की ओर बढ़ रहे हैं? अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक के बाद एक फैसलों ने दुनिया की भू-राजनीति में जबरदस्त हलचल मचा दी है। वेनेजुएला में सीधे सैन्य दखल और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद अब ग्रीनलैंड और ईरान को लेकर भी अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की अटकलें तेज हो गई हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसे अमेरिका की आक्रामक विदेश नीति का सबसे खतरनाक चरण माना जा रहा है।
3 जनवरी को अमेरिका ने ‘ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व’ के तहत वेनेजुएला की जमीन पर सीधी सैन्य कार्रवाई की। अमेरिकी विशेष बलों ने राजधानी कराकास में घुसकर राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को गिरफ्तार किया और उन्हें अमेरिका ले जाया गया। इस कार्रवाई ने न सिर्फ लैटिन अमेरिका बल्कि पूरी दुनिया को चौंका दिया। कई देशों ने इसे किसी संप्रभु राष्ट्र की संप्रभुता का खुला उल्लंघन बताया, जबकि अमेरिका ने इसे “लोकतंत्र की रक्षा” का कदम करार दिया।
वेनेजुएला के बाद अब ग्रीनलैंड को लेकर नई सनसनीखेज खबरें सामने आई हैं। ब्रिटिश अखबार डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति ट्रंप ने रविवार (11 जनवरी) को अमेरिकी सेना के वरिष्ठ विशेष बल कमांडरों को ग्रीनलैंड पर संभावित आक्रमण के लिए आकस्मिक योजनाएं तैयार करने का निर्देश दिया है।
बताया गया है कि इस योजना की जिम्मेदारी संयुक्त विशेष अभियान कमान (JSOC) को सौंपी गई है। हालांकि, अमेरिकी सेना के शीर्ष अधिकारी इस आदेश से सहमत नहीं हैं। ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ का मानना है कि ग्रीनलैंड पर किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई न सिर्फ गैरकानूनी होगी बल्कि इसके लिए कांग्रेस की मंजूरी भी जरूरी है, जो फिलहाल संभव नहीं दिखती।
ग्रीनलैंड डेनमार्क के अधीन स्वायत्त क्षेत्र है और नाटो का हिस्सा भी। ऐसे में अमेरिकी कार्रवाई से यूरोपीय देशों के साथ सीधा टकराव तय माना जा रहा है। सैन्य जनरलों का तर्क है कि यह कदम नाटो के भीतर गहरा संकट पैदा कर सकता है और गठबंधन टूटने के कगार तक पहुंच सकता है। कई विश्लेषक इसे ट्रंप का सबसे जोखिम भरा अंतरराष्ट्रीय दांव बता रहे हैं।
इधर, न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि राष्ट्रपति ट्रंप को हाल के दिनों में ईरान को निशाना बनाने वाले कई सैन्य विकल्पों पर ब्रीफ किया गया है। इन विकल्पों में तेहरान और अन्य शहरों में चुनिंदा ठिकानों पर लक्षित हमले शामिल हैं। खास बात यह है कि इनमें केवल सैन्य ठिकाने ही नहीं, बल्कि शासन के आंतरिक सुरक्षा तंत्र से जुड़े गैर-सैन्य बुनियादी ढांचे भी शामिल बताए जा रहे हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, ये सभी योजनाएं आकस्मिक रणनीति का हिस्सा हैं। अमेरिकी प्रशासन ईरान में बढ़ते सरकार विरोधी प्रदर्शनों और क्षेत्रीय तनाव के बीच यह आकलन कर रहा है कि आगे की हिंसा को रोकने के लिए कौन सा कदम सबसे प्रभावी होगा राजनयिक, आर्थिक या सैन्य।
ईरान में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच ट्रंप ने एक बार फिर तीखा बयान दिया है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि “ईरान पहले से कहीं ज्यादा आजादी के करीब है।”
ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका, ईरान को मौजूदा सरकार से आजादी दिलाने में हर संभव मदद करने के लिए तैयार है। यह सरकार ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के नेतृत्व में चल रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वेनेजुएला के बाद अगर अमेरिका ग्रीनलैंड या ईरान में सैन्य कार्रवाई करता है, तो यह वैश्विक शक्ति संतुलन को पूरी तरह बदल सकता है। एक ओर जहां ट्रंप इसे अमेरिका की ताकत और नेतृत्व का प्रतीक बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर दुनिया को नए वैश्विक संघर्ष का डर सताने लगा है।
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