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UP: गोरखपुर एम्स के डॉक्टरों की स्टडी, 1990 से 2023 तक डायरिया से मौतों में 78% की कमी,'द लैंसेट' में प्रकाशित
रजनी ओझा, गोरखपुर
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 08 Jun 2026 02:38 AM IST
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सार
अध्ययन में पाया गया कि एंटेरिक संक्रमणों से होने वाली मौतों में डायरिया जनित बीमारियों की हिस्सेदारी सबसे अधिक है। वर्ष 2023 में इन बीमारियों से दुनिया भर में करीब 11.1 लाख लोगों की मौत हुई। दक्षिण एशिया और सब-सहारा अफ्रीका इस बीमारी से सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र रहे। दक्षिण एशिया में लगभग 5.99 लाख और सब-सहारा अफ्रीका में 5.01 लाख मौतें दर्ज की गईं।
एम्स की कार्यकारी निदेशक विभा दत्ता
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
एम्स के तीन संकाय सदस्यों ने संक्रामक रोगों (डायरिया व अन्य) से जुड़े एक महत्वपूर्ण वैश्विक अध्ययन में सहयोगी के रूप में योगदान देकर संस्थान की प्रतिष्ठा बढ़ाई है। यह अध्ययन प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय जर्नल द लैंसेट इन्फेक्शियस डिजीजेज में प्रकाशित हुआ है।
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अध्ययन में वर्ष 1990 से 2023 तक दुनिया भर में एंटेरिक संक्रामक रोगों और डायरिया जनित बीमारियों के बोझ का व्यापक विश्लेषण किया गया है। इसमें डायरिया से मौतों में 78 प्रतिशत की कमी मिली है। ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज (जीबीडी) स्टडी-2023 के तहत किए गए इस शोध में 204 देशों और क्षेत्रों के आंकड़ों का अध्ययन किया गया।
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इसमें बीमारी की घटनाओं, मृत्यु दर, विकलांगता-समायोजित जीवन वर्ष (डीएएलवाई) तथा रोटावायरस, नोरोवायरस, शिगेला और एडेनोवायरस जैसे प्रमुख रोगजनकों की भूमिका का आकलन किया गया। अध्ययन में एम्स के सामुदायिक चिकित्सा विभाग के डॉ. अरूप मोहंती, डॉ. यू. वेंकटेश और डॉ. अबू बशर ने योगदान दिया।
शोध के अनुसार, वर्ष 2023 में एंटेरिक संक्रामक रोगों के कारण विश्वभर में लगभग 12.7 लाख लोगों की मृत्यु हुई, जबकि वर्ष 1990 में यह संख्या 36.9 लाख थी। इस प्रकार तीन दशकों में मौतों की संख्या में करीब 66 प्रतिशत और आयु-मानकीकृत मृत्यु दर में लगभग 78 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। यह दर 1990 में प्रति एक लाख आबादी पर 74.1 से घटकर 2023 में 16.4 रह गई।
शोध के अनुसार, वर्ष 2023 में एंटेरिक संक्रामक रोगों के कारण विश्वभर में लगभग 12.7 लाख लोगों की मृत्यु हुई, जबकि वर्ष 1990 में यह संख्या 36.9 लाख थी। इस प्रकार तीन दशकों में मौतों की संख्या में करीब 66 प्रतिशत और आयु-मानकीकृत मृत्यु दर में लगभग 78 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। यह दर 1990 में प्रति एक लाख आबादी पर 74.1 से घटकर 2023 में 16.4 रह गई।
अध्ययन में पाया गया कि एंटेरिक संक्रमणों से होने वाली मौतों में डायरिया जनित बीमारियों की हिस्सेदारी सबसे अधिक है। वर्ष 2023 में इन बीमारियों से दुनिया भर में करीब 11.1 लाख लोगों की मौत हुई। दक्षिण एशिया और सब-सहारा अफ्रीका इस बीमारी से सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र रहे। दक्षिण एशिया में लगभग 5.99 लाख और सब-सहारा अफ्रीका में 5.01 लाख मौतें दर्ज की गईं।
अध्ययन के अनुसार, सभी आयु वर्गों में डायरिया से होने वाली मृत्यु का प्रमुख कारण रोटावायरस रहा, जबकि पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में रोटावायरस, शिगेला और एडेनोवायरस प्रमुख कारण पाए गए।
अध्ययन के अनुसार, सभी आयु वर्गों में डायरिया से होने वाली मृत्यु का प्रमुख कारण रोटावायरस रहा, जबकि पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में रोटावायरस, शिगेला और एडेनोवायरस प्रमुख कारण पाए गए।
अध्ययन में यह भी स्पष्ट हुआ कि टीकाकरण, सुरक्षित पेयजल, बेहतर स्वच्छता, हाथों की सफाई, ओआरएस, जिंक सप्लीमेंटेशन और सामाजिक-आर्थिक विकास ने डायरिया जनित बीमारियों के वैश्विक बोझ को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
डॉ. अरूप मोहंती ने बताया कि अध्ययन के निष्कर्ष डायरिया की रोकथाम, बाल स्वास्थ्य, वॉश (जल, स्वच्छता और स्वच्छ व्यवहार) कार्यक्रमों, टीकाकरण तथा निगरानी प्रणालियों को और मजबूत बनाने की आवश्यकता को रेखांकित करते हैं। भारत और दक्षिण एशिया के लिए यह अध्ययन सार्वजनिक स्वास्थ्य रणनीतियों के निर्धारण में महत्वपूर्ण साबित होगा।
यह एम्स के लिए गर्व का विषय है कि हमारे संकाय सदस्य द लैंसेट इन्फेक्शियस डिजीज जैसे प्रतिष्ठित जर्नल में प्रकाशित वैश्विक अध्ययन में योगदान दे रहे हैं। इस प्रकार के अंतरराष्ट्रीय सहयोग संस्थान की शैक्षणिक और अनुसंधान पहचान को और मजबूत करते हैं और साक्ष्य-आधारित सार्वजनिक स्वास्थ्य, बाल स्वास्थ्य, संक्रामक रोग नियंत्रण और नीति-उन्मुख शोध के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं:डॉ. विभा दत्ता, कार्यकारी निदेशक, एम्स
यह एम्स के लिए गर्व का विषय है कि हमारे संकाय सदस्य द लैंसेट इन्फेक्शियस डिजीज जैसे प्रतिष्ठित जर्नल में प्रकाशित वैश्विक अध्ययन में योगदान दे रहे हैं। इस प्रकार के अंतरराष्ट्रीय सहयोग संस्थान की शैक्षणिक और अनुसंधान पहचान को और मजबूत करते हैं और साक्ष्य-आधारित सार्वजनिक स्वास्थ्य, बाल स्वास्थ्य, संक्रामक रोग नियंत्रण और नीति-उन्मुख शोध के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं:डॉ. विभा दत्ता, कार्यकारी निदेशक, एम्स