{"_id":"69a9f3614d4c68345904eb4d","slug":"aiims-to-conduct-digital-autopsy-post-mortem-without-dissection-gorakhpur-news-c-7-gkp1038-1247938-2026-03-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"Gorakhpur News: एम्स में होगी डिजिटल ऑटोप्सी, बिना चीरफाड़ होगा पोस्टमार्टम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Gorakhpur News: एम्स में होगी डिजिटल ऑटोप्सी, बिना चीरफाड़ होगा पोस्टमार्टम
विज्ञापन
विज्ञापन
गोरखपुर। एम्स में जल्द ही डिजिटल ऑटोप्सी की सुविधा शुरू की जाएगी। इस सुविधा के शुरू होने से बिना चीर-फाड़ शवों का पोस्टमार्टम हो सकेगा। विभिन्न तकनीक के जरिये मौत के कारणों और आंतरिक चोटों का पता चल सकेगा। डिजिटल ऑटोप्सी से पोस्टमार्टम करने वाला उत्तर प्रदेश का पहला संस्थान बनेगा।
एम्स में पिछले साल फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग ने पोस्टमार्टम की शुरुआत की है। अब तक 180 से अधिक पोस्टमार्टम एम्स में हो चुके हैं। अब तक हुए पोस्टमार्टम चीर- फाड़ की पुरानी पद्धति से ही हो रहे हैं। इन सबके बीच एम्स ने डिजिटल ऑटोप्सी सुविधा शुरू करने का फैसला लिया है। इसके तहत सीटी स्कैन, एमआरआई और थ्री-डी इमेजिंग तकनीकों का उपयोग कर पोस्टमार्टम की सटीक रिपोर्ट दी जाएगी। इसमें ऐसे केस की वर्चुअल ऑटोप्सी होगी, जिनमें मौत के कारणों की सही जानकारी नहीं मिलती है।गोली लगने सहित पूरी तरह से आग से जलने वाले मामले में कई बार मौत के कारणों की जानकारी सही नहीं मिल पाती है।
इसके अलावा गोली लगने के दौरान उसका छर्रा शरीर के किस-किस हिस्से में चला जाता है, यह भी पोस्टमार्टम में कई बार पता नहीं चल पाता। ऐसी स्थिति में वर्चुअल ऑटोप्सी का इस्तेमाल कर शव का सीटी स्कैन, एमआरआई और थ्री-डी इमेजिंग तकनीकों का उपयोग करके डिजिटल रूप से मौत का कारण और आंतरिक चोटों का पता लगाया जाएगा। इससे पारंपरिक पोस्टमार्टम की तुलना में उच्च और सटीक रिपोर्ट मिलेगी। एम्स में आधुनिक सीटी स्कैन मशीन है। इसमें कई तरह की सुविधाएं हैं। इसी सुविधा का इस्तेमाल वर्चुअल ऑटोप्सी में किया जाएगा।
सीटी स्कैन के जरिये शरीर के अंदर के अंगों और हड्डियों की विस्तृत थ्री-डी तस्वीरें लेकर विशेष रूप से सिर की चोटों, हड्डियों के टूटने और शरीर के अंदर विदेशी प्रतिबंधित वस्तु रखे जाने का पता भी लगाया जा सकेगा। इससे फॉरेंसिक साक्ष्य को डिजिटल रूप से स्टोर भी किया जा सकेगा। इस दौरान शव को काटने की जरूरत नहीं होगी।
एम्स की मीडिया प्रभारी डॉ. आराधना सिंह ने बताया कि एम्स में वर्चुअल ऑटोप्सी सुविधा की शुरुआत जल्द ही की जाएगी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट को पूरी तरह से डिजिटल कर दिया गया है। अब ऑटोप्सी सेवा भी जल्द ही शुरू की जाएगी। इससे सटीक और सही जानकारी कम समय में मिल सकेगी।
Trending Videos
एम्स में पिछले साल फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग ने पोस्टमार्टम की शुरुआत की है। अब तक 180 से अधिक पोस्टमार्टम एम्स में हो चुके हैं। अब तक हुए पोस्टमार्टम चीर- फाड़ की पुरानी पद्धति से ही हो रहे हैं। इन सबके बीच एम्स ने डिजिटल ऑटोप्सी सुविधा शुरू करने का फैसला लिया है। इसके तहत सीटी स्कैन, एमआरआई और थ्री-डी इमेजिंग तकनीकों का उपयोग कर पोस्टमार्टम की सटीक रिपोर्ट दी जाएगी। इसमें ऐसे केस की वर्चुअल ऑटोप्सी होगी, जिनमें मौत के कारणों की सही जानकारी नहीं मिलती है।गोली लगने सहित पूरी तरह से आग से जलने वाले मामले में कई बार मौत के कारणों की जानकारी सही नहीं मिल पाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
इसके अलावा गोली लगने के दौरान उसका छर्रा शरीर के किस-किस हिस्से में चला जाता है, यह भी पोस्टमार्टम में कई बार पता नहीं चल पाता। ऐसी स्थिति में वर्चुअल ऑटोप्सी का इस्तेमाल कर शव का सीटी स्कैन, एमआरआई और थ्री-डी इमेजिंग तकनीकों का उपयोग करके डिजिटल रूप से मौत का कारण और आंतरिक चोटों का पता लगाया जाएगा। इससे पारंपरिक पोस्टमार्टम की तुलना में उच्च और सटीक रिपोर्ट मिलेगी। एम्स में आधुनिक सीटी स्कैन मशीन है। इसमें कई तरह की सुविधाएं हैं। इसी सुविधा का इस्तेमाल वर्चुअल ऑटोप्सी में किया जाएगा।
सीटी स्कैन के जरिये शरीर के अंदर के अंगों और हड्डियों की विस्तृत थ्री-डी तस्वीरें लेकर विशेष रूप से सिर की चोटों, हड्डियों के टूटने और शरीर के अंदर विदेशी प्रतिबंधित वस्तु रखे जाने का पता भी लगाया जा सकेगा। इससे फॉरेंसिक साक्ष्य को डिजिटल रूप से स्टोर भी किया जा सकेगा। इस दौरान शव को काटने की जरूरत नहीं होगी।
एम्स की मीडिया प्रभारी डॉ. आराधना सिंह ने बताया कि एम्स में वर्चुअल ऑटोप्सी सुविधा की शुरुआत जल्द ही की जाएगी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट को पूरी तरह से डिजिटल कर दिया गया है। अब ऑटोप्सी सेवा भी जल्द ही शुरू की जाएगी। इससे सटीक और सही जानकारी कम समय में मिल सकेगी।
