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Gorakhpur News: हरा चारा पैदा करने के लिए चरागाहों में लगाई जाएगी नैपियर घास
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Tue, 10 Mar 2026 02:58 AM IST
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- गोआश्रय स्थलों पर रह रहे पशुओं को हर मौसम में मिल सकेगा हरा चारा
गोरखपुर। गो आश्रय स्थलों पर रह रहे निराश्रित गोवंश को हर मौसम में गुणवत्तापूर्ण हरा चारा मिल सके, इसके लिए पशुपालन विभाग नैपियर घास की जड़ों का वितरण करेगा। उन जड़ों को चरागाह की जमीनों पर लगाया जाएगा।
नैपियर घास की खासियत यह है कि वह अत्यधिक पौष्टिक व तेजी से बढ़ने वाली चारा फसल है। यह मवेशियों के लिए उत्तम है, क्योंकि इसमें 16 से 18 प्रतिशत प्रोटीन होता है। इसकी लंबाई आठ से दस फिट होती है। एक बार लगाने पर इसे पांच साल तक चारा के रूप में प्रयोग किया जा सकता है।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. धर्मेंद्र पांडेय ने बताया कि पशुपालकों के पास सीमित क्षेत्रफल और संसाधन होने के नाते अपने पशुओं को पर्याप्त मात्रा में चारा नहीं दे पाते हैं। नैपियर घास से उनकी समस्या का समाधान हो जाएगा। नैपियर घास से गुणवत्तायुक्त चारा पशुओं को मिलने लगेगा। इसकी सबसे खासियत यह है कि इससे हर मौसम में हरा चारा मिलता रहेगा। इसका चारा पशुओं के लिए काफी लाभदायक होगा। नैपियर की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए इसकी जड़ें अधिक से अधिक किसानों को उपलब्ध कराने की योजना है।
उन्होंने बताया कि यदि कोई किसान नैपियर की घास उगाकर उसे बेचना चाहे तो उसे खरीदा भी जाएगा। सीबीओ ने बताया कि जिले के 10 ब्लाॅकों कैंपियरगंज, बांसगांव, खजनी, चौरीचौरा, गोला, सदर, वृहद गो आश्रय स्थल गाजे गड़हा, वृहद गो आश्रय स्थल ताल नदोर सेवई बाजार के अलावा अस्थायी गो आश्रय स्थल जंगल औराही चरगांवा के पास चरागाह की भूमि पर नैपियर घास लगाई जाएंगी।
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गोरखपुर। गो आश्रय स्थलों पर रह रहे निराश्रित गोवंश को हर मौसम में गुणवत्तापूर्ण हरा चारा मिल सके, इसके लिए पशुपालन विभाग नैपियर घास की जड़ों का वितरण करेगा। उन जड़ों को चरागाह की जमीनों पर लगाया जाएगा।
नैपियर घास की खासियत यह है कि वह अत्यधिक पौष्टिक व तेजी से बढ़ने वाली चारा फसल है। यह मवेशियों के लिए उत्तम है, क्योंकि इसमें 16 से 18 प्रतिशत प्रोटीन होता है। इसकी लंबाई आठ से दस फिट होती है। एक बार लगाने पर इसे पांच साल तक चारा के रूप में प्रयोग किया जा सकता है।
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मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. धर्मेंद्र पांडेय ने बताया कि पशुपालकों के पास सीमित क्षेत्रफल और संसाधन होने के नाते अपने पशुओं को पर्याप्त मात्रा में चारा नहीं दे पाते हैं। नैपियर घास से उनकी समस्या का समाधान हो जाएगा। नैपियर घास से गुणवत्तायुक्त चारा पशुओं को मिलने लगेगा। इसकी सबसे खासियत यह है कि इससे हर मौसम में हरा चारा मिलता रहेगा। इसका चारा पशुओं के लिए काफी लाभदायक होगा। नैपियर की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए इसकी जड़ें अधिक से अधिक किसानों को उपलब्ध कराने की योजना है।
उन्होंने बताया कि यदि कोई किसान नैपियर की घास उगाकर उसे बेचना चाहे तो उसे खरीदा भी जाएगा। सीबीओ ने बताया कि जिले के 10 ब्लाॅकों कैंपियरगंज, बांसगांव, खजनी, चौरीचौरा, गोला, सदर, वृहद गो आश्रय स्थल गाजे गड़हा, वृहद गो आश्रय स्थल ताल नदोर सेवई बाजार के अलावा अस्थायी गो आश्रय स्थल जंगल औराही चरगांवा के पास चरागाह की भूमि पर नैपियर घास लगाई जाएंगी।
