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Gorakhpur News: हिस्ट्रीशीटर के इशारे पर काम करती थी अंशिका
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- वाहनचोरी के मामले में हिस्ट्रीशीटर के साथ नामजद हुई थी, पुलिस ने शुरू की दबिश
- हिस्ट्रीशीटर ने ही अंशिका को उपलब्ध कराई थी पिस्टल, पुलिस अब गिरोह के अन्य साथियों की तलाश में जुटी
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। कैंट थाना क्षेत्र के सिंघड़िया में अस्पताल मैनेजर पर गोली चलाने की आरोपी अंशिका सिंह उर्फ अंतिमा की जांच के दौरान नया मोड़ सामने आया है। शुरुआती जांच में पता चला कि इस घटना में शामिल अंशिका एक हिस्ट्रीशीटर के संपर्क में थी और उसकी इशारे पर लोगों को अपने जाल में फांसकर ब्लैकमेल करती थी। प्रारंभिक पूछताछ में यह तथ्य सामने आया कि पिस्टल, जिससे अमिताभ के ऊपर फायरिंग की गई थी, भी उसी हिस्ट्रीशीटर ने अंशिका को उपलब्ध कराई थी।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, 12 अक्तूबर 2025 को अंशिका और उसके छह साथियों के खिलाफ चोरी और थार जीप पर फर्जी नंबर प्लेट लगाने के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। आरोप है कि अंशिका अपने साथियों के साथ दिल्ली से थार चोरी कर फर्जी नंबर प्लेट लगाकर घूमती थी। पुलिस ने मामले में बड़हलगंज के दोरम्हा निवासी प्रियप्रवास दुबे उर्फ विक्की और देवरिया के बरहज बाजार निवासी आकाश वर्मा उर्फ बंटी को गिरफ्तार किया था। वहीं अंशिका ने मामले में गिरफ्तारी पर रोक के लिए स्टे ले लिया था।
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पुलिस की प्राथमिकी और जांच रिपोर्ट में यह जानकारी भी सामने आई कि अंशिका और हिस्ट्रीशीटर का जुड़ाव लंबे समय से था। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि शुरुआती पूछताछ में अंशिका ने कई महत्वपूर्ण जानकारियां दी हैं। इसके साथ ही पुलिस को यह भी जानकारी मिली कि गिरोह के अन्य गुर्गे अब भी सक्रिय हैं और वह इलाके में विभिन्न अपराधों की साजिश कर रहे हैं।
हिस्ट्रीशीटर समेत अन्य की तलाश में जुटी पुलिस
सिंघड़िया फायरिंग कांड में अंशिका के साथ कार में सवार कार अन्य चार युवकों का नाम पहले से ही संदिग्धों में शामिल था। भूमिका स्पष्ट होने के बाद अब पुलिस का फोकस पूरी तरह से गिरोह के अन्य गुर्गों की तलाश पर केंद्रित हो गया है। पुलिस टीम उनके ठिकानों पर दबिश दे रही है।
पूरी रात जेल में करवटें बदलती रही अंशिका, नहीं खाया खाना
सिंघड़िया फायरिंग कांड में गिरफ्तार अंशिका जेल में पूरी रात बेचैनी में करवटें बदलती रही। जेल सूत्रों के अनुसार, उसने रात का खाना भी नहीं खाया। अंशिका अपनी मानसिक स्थिति को संभालने की कोशिश कर रही थी और लगातार आगामी पूछताछ और गिरोह के अन्य गुर्गों की गिरफ्तारी के सवालों को लेकर तनाव में थी। पुलिस ने उसकी मानसिक स्थिति और सुरक्षा के लिहाज से निगरानी बढ़ा दी है।
वर्जनमोबाइल की कॉल डिटेल के साथ बैंक खातों को भी खंगाला जा रहा है ताकि यह पता चले कि किसने और किस मद में रुपये दिए हैं। इसके साथ ही वारदात के वक्त कार में बैठे उसके अन्य साथियों की तलाश में दबिश भी दी जा रही है।
- योगेंद्र सिंह, सीओ कैंट
